Sunday, February 15, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. हेल्थ
  3. सावधान! बच्चों को भी हो सकता है कैटरैक्ट, इन मिथकों के चलते लोग बरतने लगते हैं लापरवाही

सावधान! बच्चों को भी हो सकता है कैटरैक्ट, इन मिथकों के चलते लोग बरतने लगते हैं लापरवाही

Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth Published : Jun 28, 2025 06:41 am IST, Updated : Jun 28, 2025 06:41 am IST

Cataract Awareness Month 2025: भारत में मोतियाबिंद दो तिहाई ब्लाइंडनेस मामलों का कारण है। कैटरैक्ट किसी भी उम्र के लोगों को और कभी भी हो सकता है। लेकिन जागरुकता में कमी और मिथकों के चलते अक्सर लोग लापरवाही बरतते हैं।

मोतियाबिंद- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK मोतियाबिंद

जून का महीना आपकी आंखों की देखभाल और उससे जुड़ी बीमारियों को लेकर जागरुत करने का होता है। जून कैटरैक्ट अवेयरनेस का महीना है। कैटरैक्ट यानि मोतियाबिंद दुनियाभर में अंधेपन का एक बड़ा कारण है। हालांकि समय से इसका पता चलने पर इलाज बहुत आसान है और सही होने की संभावना बहुत ज्यादा हैं। भारत में मोतियाबिंद से अंधेपन के मामले कहीं ज्यादा हैं। इसकी वजह जागरूकता की कमी, देर से इलाज और कुछ मिथक हैं। ऐसे में जरूरी है कि आपको मोतियाबिंद के बारे में सही जानकारी हो, जिससे समय पर इलाज मिल सके।

कैटरैक्ट को लेकर लोगों के मन में कई तरह के मिथक हैं। जैसे ये उम्र बढ़ने पर होने वाली बीमारी है। युवाओं को मोतियाबिंद नहीं हो सकता है। लेकिन आपका ये मामना बिल्कुल गलत है। डॉ. महिपाल सिंह सचदेव, चेयरमैन एवं मेडिकल डायरेक्टर (सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ आई हॉस्पिटल्स) ने बताया कि उम्र बढ़ना इसका सबसे सामान्य कारण है, लेकिन मोतियाबिंद डायबिटीज, धूम्रपान, अल्ट्रावॉयलेट किरणों के लंबे समय तक संपर्क, आंखों की चोट या स्टेरॉयड जैसी दवाओं के लंबे उपयोग से भी हो सकता है। यहां तक कि बच्चों को भी मोतियाबिंद हो सकता है। लेकिन दुर्भाग्य से, अब भी कई लोग इसे उम्र बढ़ने की और सामान्य प्रक्रिया मानते हैं और तब तक इलाज नहीं कराते जब तक उनकी दृष्टि गंभीर रूप से प्रभावित न हो जाए।

कैटरैक्ट से जुड़े मिथक

भारत में कैटरैक्ट, ब्लाइंडनेस का प्रमुख कारण है और यह 66% से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार है। इसके बावजूद लोग समय पर सर्जरी नहीं करवाते क्योंकि उनके मन में कई मिथक और डर बने रहते हैं। मोतियाबिंद को लेकर एक और भ्रांति यह है कि इसको आई ड्रॉप्स, डाइट या एक्सरसाइज से ठीक किया जा सकता है। जबकि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है कि इसका इलाज केवल सर्जरी है। यह सोच भी गलत है कि जब तक नजर बहुत कमजोर न हो जाए, तब तक सर्जरी न कराएं। समय पर सर्जरी से बेहतर नतीजे और जल्दी स्वस्थ होने की संभावना होती है। 

कैटरैक्ट की सर्जरी

आपको बता दें आज मेडिकल फील्ड में तेजी से बढ़ रही तकनीक से कैटरैक्ट सर्जरी बेहद सुरक्षित है और यह लोकल एनेस्थीसिया में की जाती है, जिसमें दर्द न के बराबर होता है और मरी जल्दी ठीक हो जाता है। आधुनिक इन्ट्राऑकुलर लेंस (IOL) जैसे एक्सटेंडेड डेप्थ ऑफ फोकस (EDOF) लेंस दूर और पास दोनों की बेहतरीन आई साइट देने हैं, जिससे कई बार लोगों का चश्मा भी हट जाता है या कम हो जाता है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

Latest Health News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। हेल्थ से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।

Advertisement
Advertisement
Advertisement