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क्या बकरी का दूध डेंगू में फायदेमंद होता है, क्या इससे तेजी से प्लेटलेट्स बढ़ते हैं, आइये जानते हैं सच्चाई

 Written By: Bharti Singh
 Published : Aug 20, 2026 07:07 am IST,  Updated : Aug 20, 2026 07:07 am IST

गाय भैंस के मुकाबले बकरी का दूध काफी हल्का और सुपाच्य माना जाता है, लेकिन क्या बकरी का दूध पीने से डेंगू जैसी बीमारियों का भी इलाज किया जा सकता है। क्या बकरी का दूध पीने से प्लेटलेट्स बढ़ते हैं। आइये आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानते हैं इसकी सच्चाई क्या है?

डेंगू में बकरी का दूध- India TV Hindi
डेंगू में बकरी का दूध Image Source : INDIA TV

बारिश के मौसम में मच्छरों से फैलने वाली बीमारी डेंगू लोगों को बीमार करती है। जमा हुए पानी में डेंगू का मच्छर पनपता है और लोगों को काटने के बाद बीमार करता है। डेंगू होने पर कई आयुर्वेदिक नुस्खे अपनाए जाते हैं। जिसमें से एक है बकरी का दूध, आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानते हैं क्या बकरी का दूध डेंगू में फायदेमंद होता है। क्या वाकई बकरी का दूध पीने से प्लेटलेट्स बढ़ते हैं।

क्या बकरी का दूध डेंगू से बचाता है?

आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा के मुताबिक, आयुर्वेद में बकरी के दूध को  'छाग पय' कहा गया है। इसका अर्थ आयुर्वेद के एक विख्यात श्लोक से समझते हैं-  

छागं पयः स्यात् प्रथमं प्रयोगे गव्यं शृतं पञ्चगुणे जले वा।

सशर्करं माक्षिकसंप्रयुक्तं विदारिगन्धादिगणैः शृतं वा॥ 

चरक संहिता (चिकित्सास्थान, अध्याय 8 — 'राजयक्ष्मा चिकित्सा')

अर्थात शरीर के रक्तपित्त और कमजोरी जैसे टीबी/राजयक्ष्मा के इलाज के लिए बकरी का दूध पहली पसंद होना चाहिए। अगर बकरी का दूध न मिले, तो गाय के दूध में उससे पांच गुना पानी मिलाकर तब तक उबालना चाहिए जब तक कि पानी पूरी तरह सूख न जाए। इसके बाद इसमें मिश्री मिलाकर या विदारीगंधादि गण समूह की ताकत बढ़ाने वाली जड़ी-बूटियों के साथ पकाकर मरीज को देना चाहिए।

बकरी के दूध के कुछ प्रमुख फायदे

आसानी से पचने वाला- बकरी का दूध आसानी से पचने वाला होता है। इसके फैट के कण गाय के दूध की तुलना में छोटे होते हैं, जिससे यह पेट के लिए हल्का होता है और जल्दी पच जाता है।

ब्लीडिंग और खांसी में आराम- बकरी का दूध ब्लीडिंग की समस्या, पुरानी खांसी और क्षय रोग यानि टीबी जैसी बीमारियों में फायदा करता है। कमजोरी वाली बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए टॉनिक का काम करता है।

इम्यूनिटी और ताकत बढ़ाए- इसमें मौजूद जिंक, सेलेनियम और जरूरी फैटी एसिड शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और एनर्जी देते हैं।

हड्डियों की मजबूती- बकरी का दूध कैल्शियम, मैग्नीशियम और फ़ॉस्फोरस का अच्छा स्रोत है, जो हड्डियों की डेंसिटी बनाए रखने में मदद करते हैं।

रिसर्च क्या कहती है?

एक स्टडी से पता चला है कि बकरी का दूध प्लेटलेट काउंट नहीं बढ़ाता है। इसके उलट, कच्चा या बिना पाश्चराइज्ड किया हुआ बकरी का दूध पीने से मरीजों को ब्रुसेलोसिस हो सकता है, जो ब्रूसेला मेलिटेंसिस से होने वाला एक गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन है। एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि इससे डेंगू से ठीक होने में रुकावट भी आ सकती है।

डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार, बकरी के दूध में बहुत से पोषक तत्वों का मिश्रण होता है, ये शरीर में ऊर्जा वापस लौटाता है और शरीर को स्वस्थ रखता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ का मानना है कि ये बुखार और खांसी जैसी बीमारियों में बहुत असरदार है। परंतु किसी भी बड़े मेडिकल शोध में यह साबित नहीं हुआ है कि बकरी का दूध पीने से प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ते हैं। किसी भी रोग का उपाय करने से पहले उसकी उत्पत्ति के बारे में अच्छे  से जानें, सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास न करें, अपने विवेक से सोचें।

 

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