नई दिल्ली: विवादों में आगे रहनेवाले केजरीवाल के विधायक काम में बेहद पिछड़े साबित हुए हैं। दिल्ली में इसके 70 फीसदी विधायकों को उम्मीद से कम प्रदर्शन करने वाला पाया गया है। मुंबई के भाजपा, शिवसेना और कांग्रेस विधायकों की तुलना में भी दिल्ली के आप विधायक कमतर साबित हुए हैं।
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साल 2015 में दिल्ली विधानसभा के सत्रों के आंकड़ों से पता चलता है कि राष्ट्रीय राजधानी के करीब 33 फीसदी विधायकों, जिनमें आप के सदस्यों की संख्या अच्छी-खासी है, ने चर्चाओं में बमुश्किल हिस्सेदारी की। प्रजा फाउंडेशन की ओर से जारी की गई रिपोर्ट के तहत यह निष्कर्ष सामने आए हैं।
इन निष्कर्षों में दावा किया गया है कि सरकार और नगर निगमों को मच्छरों से होने वाली परेशानी और फॉगिंग नहीं किए जाने की 10,102 शिकायतें पिछले साल आईं, लेकिन किसी विधायक ने इस मुद्दे को सदन में नहीं उठाया।
रिपोर्ट में कहा गया कि सदन में उठाए गए मुद्दों की गुणवत्ता के मामले में 72 फीसदी विधायक उम्मीद से कमतर साबित हुए हैं । मुंबई के विधायक इस मामले में कहीं बेहतर काम कर रहे हैं । इस रिपोर्ट में आप के एस के बग्गा, नितिन त्यागी और भाजपा के जगदीश प्रधान को बेहतरीन काम करने वालों में से बताया गया है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य मंत्रियों को छोड़कर (2015 में) आप के विधायकों - स्पीकर, डिप्टी-स्पीकर और दिल्ली कैंट के विधायक सुरिंदर सिंह ने 58.44 फीसदी अंक हासिल किए जबकि भाजपा के तीन विधायकों को 66.04 फीसदी मिले। आरटीआई और एक सर्वेक्षण शोध संगठन की ओर से दिल्ली के 29,950 लोगों के निजी इंटरव्यू के जरिए हासिल किए गए आंकड़ों के आधार पर विधायकों की रेटिंग की गई ।