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भीमा कोरेगांव केस: सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से लिखित नोट दाखिल करने को कहा, फैसला सुरक्षित

भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तार 5 लोगों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुरक्षित रखा है

Edited by: IndiaTV Hindi Desk
Published : Sep 20, 2018 01:31 pm IST, Updated : Sep 20, 2018 02:02 pm IST
Bhima-Koregaon case, Bhima-Koregaon case Supreme Court- India TV Hindi
Bhima-Koregaon case, Bhima-Koregaon case Supreme Court

नई दिल्ली: भीमा कोरेगांव केस में 5 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुरक्षित रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार 5 कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई और उनकी गिरफ्तारी के मामले की विशेष जांच टीम (SIT) से जांच कराने का अनुरोध करने वाली इतिहासकार रोमिला थापर और अन्य की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई पूरी कर ली। इस मामले में कोर्ट फैसला बाद में सुनाएगा।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने इस मामले में याचिकाकर्ताओं, प्राथमिकी दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता और महाराष्ट्र सरकार की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी, हरीश साल्वे और अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा। पीठ ने महाराष्ट्र पुलिस को कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले की जांच से संबंधित केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया, जबकि उसने संबंधित पक्षों को 24 सितंबर तक अपने लिखित कथन दाखिल करने का निर्देश दिया है।

महाराष्ट्र पुलिस ने पिछले साल 31 दिसंबर को ऐलगार परिषद के सम्मेलन के बाद कोरेगांव-भीमा गांव में हिंसा के मामले में दर्ज प्राथमिकी की जांच के सिलसिले में कई स्थानों पर छापे मारे थे और 28 अगस्त को पांच कार्यकर्ताओं-वरवरा राव, अरूण फरेरा, वर्नेन गोन्साल्विज, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा को गिरफ्तार किया था। इतिहासकार रोमिला थापर, अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक और देवकी जैन, समाजशास्त्र के प्रफेसर सतीश देशपाण्डे और मानवाधिकार कार्यकर्ता माजा दारूवाला ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर इन मानवाधिकार एवं नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई तथा उनकी गिरफ्तारी की स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध किया था।

कोर्ट ने 29 अगस्त को इन सभी कार्यकर्ताओं को उनके घरों में ही नजरबंद रखने का आदेश दिया था। इसके बाद से वे घरों में ही नजरबंद हैं।

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