पटना: पटना हाईकोर्ट द्वारा पूर्व गत 5 अप्रैल को अधिसूचित शराबबंदी कानून को निरस्त किए जाने के दो दिनों के बाद बिहार सरकार आज नया शराबबंदी कानून लागू किया है जिसमें अधिक कड़े प्रावधान है। नए शराबबंदी कानून में कुछ अधिक कड़े प्रावधान यथा कारावास की अवधि बढाए जाने, जुर्माने की राशि में वृद्धि, किसी घर से शराब की बोतल बरामद होने की स्थिति में सभी व्यस्क की गिरफ्तारी तथा शराबबंदी का उल्लंघन बार-बार करने पर किसी भी इलाके पर सामुहिक जुर्माना आदि शामिल किए गए हैं।
गांधी जयंती के अवसर पर इस नए शराबबंदी कानून के लागू हो जाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आज संपन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में संकल्प लिया गया कि राज्य में शराबबंदी को लेकर हमारा निश्चय अटल है और इस सामाजिक बदलाव के कार्य में हम पूरी इच्छा शक्ति के साथ लगे रहेंगे।
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मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद और अन्य मंत्रियों तथा मुख्यसचिव अंजनी कुमार सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों की उपस्थिति में नीतीश ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि गांधी जयंती के पुनीत दिवस पर मद्य निषेध का नया कानून लागू हुआ है। चंपारण सत्याग्रह (1917) के सौवें साल के अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को यही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।
नीतीश ने कहा कि प्रदेश में गत अप्रैल से लागू शराबबंदी एक जन चेतना का रूप ले चुकी है और प्रदेश में पूर्ण मद्य निषेध को लागू कर राज्य में सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद रखी गयी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता गांधी की स्मृति में इस जन चेतना को और तेज करते रहेंगे, इसके लिए और भी सशक्त अभियान चलाया जाएगा।
गत 4 अगस्त को बिहार विधानमंडल द्वारा पारित और गत 7 सितंबर को राज्यपाल रामनाथ कोविंद द्वारा अनुमोदित नया शराबबंदी कानून (बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016) जिसे बिहार सरकार गांधी जयंती के अवसर लागू करने का गत 14 सितंबर को निर्णय ले लिया था।
नए शराबबंदी कानून में किसी उत्पाद अथवा पुलिस अधिकारी द्वारा इस अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को तंग करने के लिए तलाशी, जब्ती, हिरासत अथवा गिरफ्तार करने पर उसके खिलाफ मुकदमा चलाए जाने का प्रावधान किया गया है तथा दोष सिद्ध होने पर तीन साल का कारावास और एक लाख रूपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
नीतीश ने कहा कि संपूर्ण बिहार में शराबबंदी के प्रति जनसामान्य विशेषकर महिलाओं में काफी उत्साह है। सामान्य जन भावान हमेशा से शराब के विरूद्ध रही है और इसलिए हमारे निर्णय को अपार जनसमर्थन प्राप्त हुआ है। सरकार ने सभी के सहयोग से शराबबंदी के इस सामाजिक अभियान को जन आंदोलन में बदला है। साथ ही प्रभावकारी कार्यान्यवन सुनिश्चित करने तथा इसे नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त कानूनी प्रावधान भी किए गए हैं।