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‘शक्ति परीक्षण में जीत से भी रावत पर भ्रष्टाचार के आरोप खत्म नहीं’

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 11, 2016 07:05 pm IST,  Updated : May 11, 2016 07:18 pm IST

हरीश रावत की जीत को महज एक तकनीकी बात करार देते हुए भाजपा ने बुधवार को कहा कि इससे पूर्व मुख्यमंत्री अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी नहीं हो गए हैं।

Ajay Bhatt- India TV Hindi
Ajay Bhatt

देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा में मंगलवार हुए शक्ति परीक्षण में हरीश रावत की जीत को महज एक तकनीकी बात करार देते हुए भाजपा ने बुधवार को कहा कि इससे पूर्व मुख्यमंत्री अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी नहीं हो गए हैं। भाजपा ने कहा कि पार्टी प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज करेगी। दस विधायकों के रावत को छोड़कर जाने की बात को विधानसभा के पटल पर हुई उनकी जीत से कम अहम नहीं बताते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा इतने बड़े पैमाने पर हुआ पलायन यह दिखाता है कि रावत तानाशाह हो गए हैं और लोग उनके साथ दम घुटा हुआ महसूस कर रहे हैं।

इकहत्तर सदस्यों वाली विधानसभा में रावत के आज भी अल्पमत में होने का दावा करते हुए भट्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी पार्टी का संघर्ष जारी रहेगा। गत 18 मार्च को राज्य विधानसभा में विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की भाजपा की मांग के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा समेत नौ कांग्रेस विधायकों के आने के बाद मंगलवार को शक्ति परीक्षण में वोटिंग के दौरान कांग्रेस विधायक रेखा आर्य ने भी भाजपा का साथ दिया था। इस प्रकार अब तक कांग्रेस के 10 विधायक रावत का साथ छोड़ चुके हैं।

भट्ट ने यह भी कहा कि केंद्र ने स्वयं उच्चतम न्यायालय से मंगलवार को हुए शक्ति परीक्षण के नतीजों के आधार पर प्रदेश से राष्ट्रपति शासन हटाने की अनुमति मांगी है, जो उसकी लोकतांत्रिक और विधायी नियमों के नियमो के प्रति सम्मान दिखाता है। इस बात की आशंका व्यक्त करते हुए कि हरीश रावत उच्चतम न्यायालय के अपने हक में दिए गए निर्णय को लूट के लाइसेंस के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं, भट्ट ने कहा कि यह प्रदेश भाजपा ने बनाया है और वह इसके संसाधनो को किसी को लूटने नहीं देगी।

विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल को प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगने के लिये जिम्मेदार ठहराते हुए भाजपा नेता ने कहा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की शह पर 18 मार्च को राज्य विधानसभा में संवैधानिक नियमों को ताक पर रखकर अध्यक्ष के तौर पर अपनी असीमित शक्तियों का दुरूपयोग किया। भट्ट ने केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री वैंकया नायडू के इन विचारों से भी सहमति जताई कि विधानसभा अध्यक्ष को तानाशाह की तरह काम करने का हक देने वाले असीमित अधिकारों की समीक्षा की जानी चाहिए और उसके लिए संविधान में संशोधन का विकल्प खोजा जाना चाहिए।

उच्चतम न्यायालय द्वारा शक्ति परीक्षण में हरीश रावत की जीत की औपचारिक घोषणा होने के तुरंत बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए भट्ट ने कहा कि इस विजय से वह भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी नहीं हो सकते। उन्होंने कहा, रावत ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्हें एक स्टिंग आपरेशन में अपनी ही पार्टी के असंतुष्ट विधायकों का समर्थन लेने के लिए सौदेबाजी करते दिखाया गया है। कांग्रेस विधायक मदन बिष्ट ने भी एक अन्य स्टिंग आपरेशन में खुद कहा है कि शक्ति परीक्षण में रावत के समर्थन में मत देने के लिए 12 विधायको को घूस दी गई। शक्ति परीक्षण में पास होने का यह मतलब नहीं है कि वह भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी हो गए हैं। भट्ट ने कहा कि जल्दी ही पार्टी भ्रष्टाचार हटाओ, उत्तराखंड बचाओ अभियान का दूसरा चरण एक नई शक्ति के साथ शुरू करेगी और हरीश रावत सरकार के भ्रष्टाचार को बेनकाब कर देगी।

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