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कॉल सेंटर घोटाला: शिकार फंसाने के लिए सर्च साइटों का किया गया इस्तेमाल

 Written By: Bhasha
 Published : Oct 21, 2016 05:51 pm IST,  Updated : Oct 21, 2016 05:51 pm IST

कॉल सेंटर रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद जांच में यह बात सामने आई है कि इस रैकेट से जुड़े लोग शिकार फंसाने के लिए सर्च साइटों को इस्तेमाल करते थे।

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मुम्बई: कॉल सेंटर रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद जांच में यह बात सामने आई है कि इस रैकेट से जुड़े लोग शिकार फंसाने के लिए सर्च साइटों को इस्तेमाल करते थे। सर्च वेबसाइट्स के जरिए गिरोह के लोग अपने शिकार के भुगतान की क्षमता का पता लगा लेते थे फिर उन्हें कॉल किया जाता था।

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पुलिस ने बताया कि एक साथ कई लोगों को इंटरनेट आधारित कॉल किया जाता था और संभावित शिकारों को यह फोन सुनाया जाता था और उन्हें धमकाया भी जाता था। एक साथ कई लोगों को फोन किया जाना तकनीकी शब्दावली में ब्लास्टिंग कहा जाता है। 

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ''कुछ शिकार इससे डर जाते थे और वे पलटकर फोन करते थे। जब पलटकर फोन आता था तब कॉल सेंटर के कार्यकारी उसकी भुगतान क्षमता को समझने के लिए उसके नंबर के माध्यम से वेबसाइटों (जिनपर लोगों के नाम, पते और अन्य ब्योरे होते थे)पर सर्फिंग करता था। 

अधिकारी ने बताया कि कॉलसेंटर एजेंट अपने शिकार को गहरी बातचीत में उलझाकर यह तय करता था कि उसे कितना भुगतान करना है। अधिकारी ने कहा, जांच के दौरान खुलासा हुआ कि घोटाले के सूत्रधार सागर ठक्कर उर्फ शैग्गी और उसके साथी अहमदाबाद से वीओआईपी कॉल ब्लास्ट करते थे। 

उन्होंने बताया कि ये कॉल डायरेक्ट इनवार्ड डायलिंग (डीआईडी)के माध्यम से किये जाते थे। डीआईडी में एक सॉफ्टवेयर की मदद से एक साथ 10 अमेरिकी नागरिकों को कॉल मिल सकता था। 

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