शनि ग्रह जब सूर्य के अत्यधिक करीब आ जाते हैं तो अस्त हो जाते हैं और अपनी ऊर्जा खो बैठते हैं। कई लोगों की कुंडली में शनि ग्रह अस्त अवस्था में रहते हैं जिसके चलते संघर्ष उनके जीवन में आ सकते हैं। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि अस्त शनि को कैसे अनुकूल किया जा सकता है और शनि के अस्त होने से आपके जीवन पर क्या प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
शनि अस्त का जीवन पर प्रभाव
- अस्त शनि करियर के क्षेत्र में चुनौतियां पैदा कर सकते हैं और लंबे समय तक व्यक्ति को संघर्षों का सामना करना पड़ सकता है।
- शनि सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं ऐसे में जब शनि अस्त होते हैं तो कार्यों की सिद्धि में अत्यधिक विलंब कर सकते हैं।
- स्वास्थ्य समस्याओं का सामना शनि के अस्त होने से व्यक्ति को करना पड़ सकता है। जोड़ों, हड्डियों और पैरों में दर्द की समस्या रह सकती है।
- अस्त शनि पिता, उच्च अधिकारियों से भी मतभेद पैदा कर सकता है।
- शनि के अस्त होने से व्यक्ति में आलस्य की अधिकता देखने को मिल सकती है और न्याय के मार्ग से भी व्यक्ति भटक सकता है।
अस्त शनि को अनुकूल करने के उपाय
- अस्त शनि को अनुकूल करने का सबसे अच्छा उपाय है हनुमान जी की आराधना। प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को शनि के अस्त होने पर भी शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। इसके साथ ही शनि अस्त के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए बजरंग बाण का पाठ करना भी शुभ रहता है।
- शनि ग्रह के मंत्र 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः' का प्रतिदिन या फिर सप्ताह में दो दिन मंगल और शनिवार को जप करने से शनि की प्रतिकूलता दूर होती है और शुभ फल प्राप्त होते हैं।
- शनि अस्त के दुष्प्रभावों से बचने के लिए व्यक्ति को शनिवार के दिन सरसों के तेल का दान करना चाहिए।
- जो लोग जरूरतमंदों की सहायता करते हैं, असहाय लोगों के सेवा करते हैं उन पर भी शनि के अस्त होने का प्रभाव नहीं दिखता।
- शनि को मजबूत करने के लिए लोहे, काले तिल का दान करना भी बेहद शुभ माना जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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