नई दिल्ली: सरकार ने आज कहा कि वह देश में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) का पूरा मॉडल सुधारेगी ताकि इसकी गुणवत्ता में सुधार हो, साथ ही देश में एक साल के अंदर कौशल विकास का नेटवर्क बिछा दिया जाएगा।
लोकसभा में रक्षाताई खड़से के प्रश्न के उत्तर में कौशल विकास मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी ने अप्रेंटिसशिप के प्रमाणपत्र दिये जाने में देरी की बात स्वीकार करते हुए कहा कि इतने सालों से प्रमाणपत्रों में केवल नाम अंकित करने के लिए उन्हें राज्यों को भेजे जाने और इस काम के लिए निविदा जारी करने की विचित्र परंपरा के कारण छात्रों को समय पर प्रमाणपत्र नहीं मिल पाते।
रूड़ी ने कहा कि उनका मंत्रालय इस बात को ध्यान में रखते हुए छात्रों के प्रमाणपत्रों में नाम आदि की जानकारी यहीं अंकित कराने की व्यवस्था कर रहा है जिसके लिए राज्यों से सूची मंगवाई जाएगी और इससे ढाई तीन लाख छात्रों को लाभ होगा। उन्होंने प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि मुंबई क्षेत्र के 10277 अभ्यर्थियों को अप्रेंटिस के प्रमाणपत्र उक्त वजह से अभी तक नहीं दिये जा सके हैं। जिन्हें अब लाभ होगा।
मंत्री ने कहा, देरी से बचने के लिए आईटीआई छात्रों के लिए और मॉड्यूलर एंप्लोयेबल स्किल्स (एमईएस) के तहत प्रशिक्षण पाने वाले अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन प्रणाली शुरू की गयी है। उन्होंने कहा कि अभी तक देश में कौशल विकास की प्रक्रिया चरमराई हुई थी। कई योजनाएं और कई एजेंसियां थी लेकिन उनमें समन्वय नहीं था। अब सभी छोटी छोटी योजनाओं को एक किया जा रहा है। इस संबंध में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के पोर्टल पर समस्त जानकारी उपलब्ध है। राज्य सरकारें भी पोर्टल पर खुद को उपलब्ध कराना चाहती हैं।
रूड़ी ने कहा, हम एक साल में पूरे भारत में कौशल विकास का जाल बिछा देंगे। यह कठिन काम है लेकिन हम इसे पटरी पर ला रहे हैं। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों को कौशल विकास प्रशिक्षण के सवाल पर मंत्री ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयूजीकेवाई) फिलहाल ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत आती है जिसे कौशल विकास मंत्रालय के अधीन लाने के लिए वह प्रयासरत हैं।
उन्होंने कहा कि अगले छह महीने में प्रत्येक आदिवासी और कमजोर क्षेत्रों में एक अत्याधुनिक कौशल प्रशिक्षण केंद्र खोला जाएगा। उनका ध्यान देश के 10 करोड़ आदिवासियों और गरीबों पर है। रूड़ी ने कौशल को स्कूली शिक्षा से जोड़ने पर भी जोर दिया।