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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने तीन तलाक और बहु-विवाह प्रथा का विरोध किया

 Written By: Bhasha
 Published : Oct 07, 2016 09:15 pm IST,  Updated : Oct 07, 2016 09:15 pm IST

भारत के संवैधानिक इतिहास में पहली बार केंद्र ने मुसलमानों के बीच तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह प्रथा का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया।

Triple Talaq- India TV Hindi
Triple Talaq Image Source : PTI

नई दिल्ली: भारत के संवैधानिक इतिहास में पहली बार केंद्र ने मुसलमानों के बीच तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह प्रथा का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया। साथ ही, लैंगिक समानता और धर्मनिरपेक्षता जैसे आधार पर इन पर पुनर्विचार करने का समर्थन किया। तीन तलाक से मतलब एक साथ तीन बार तलाक बोलने से है। 

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कानून एवं न्याय मंत्रालय ने अपने हलफनामे में लैंगिक समानता, धर्मनिरपेक्षता, अंतरराष्ट्रीय समझौतों, धार्मिक व्यवहारों और विभिन्न इस्लामी देशों में वैवाहिक कानून का जिक्र किया ताकि यह बात सामने लाई जा सके कि एक साथ तीन बार तलाक की परंपरा और बहुविवाह पर शीर्ष न्यायालय द्वारा नये सिरे से फैसला किए जाने की जरूरत है। 

मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मुकुलिता विजयवर्गीय द्वारा दाखिल हलफनामा में बताया गया है कि तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह की प्रथा की मान्यता पर लैंगिक न्याय के सिद्धांतों तथा गैर भेदभाव, गरिमा एवं समानता के सिद्धांतों के आधार पर विचार किए जाने की जरूरत है। 

मुसलमानों में ऐसी परंपरा की मान्यता को चुनौती देने के लिए शायरा बानो द्वारा दायर याचिका सहित अन्य याचिकाओं का जवाब देते हुए केंद्र ने संविधान के तहत लैंगिक समानता के अधिकार का निपटारा किया था। केंद्र ने अपने 29 पन्नों के हलफनामे में कहा है कि लैंगिक समानता और महिलाओं की गरिमा पर कोई सौदेबाजी और समझौता नहीं हो सकता। 

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