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सफल मिशन था चंद्रयान 2, युवाओं में जिज्ञासा पैदा हुयी : प्रधानमंत्री मोदी

Reported by: Bhasha Published : Nov 05, 2019 08:19 pm IST, Updated : Nov 05, 2019 08:19 pm IST

देश के वैज्ञानिकों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि ‘चंद्रयान 2’ एक सफल मिशन था और इससे युवाओं में विज्ञान को लेकर उत्सुकता पैदा हुयी। 

PM Narendra Modi- India TV Hindi
PM Narendra Modi

कोलकाता: देश के वैज्ञानिकों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि ‘चंद्रयान 2’ एक सफल मिशन था और इससे युवाओं में विज्ञान को लेकर उत्सुकता पैदा हुयी। प्रधानमंत्री ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के बिना दुनिया का कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि जीवन के अन्य पहलुओं के विपरीत लोगों को वैज्ञानिक अनुसंधानों से तत्काल परिणामों की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सकता है कि वैज्ञानिक खोजों से वर्तमान पीढ़ी को तत्काल मदद नहीं मिले लेकिन भविष्य में यह फायदेमंद हो सकती हैं। 

पीएम मोदी ने वीडियो कॉफ्रेंस के जरिए कोलकाता में ‘भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव’ को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हमारे वैज्ञानिकों ने चंद्रयान 2 पर बहुत मेहनत की। सब कुछ योजना के अनुसार नहीं हुआ, लेकिन यह मिशन सफल था। यदि आप व्यापक परिप्रेक्ष्य की ओर देखें, तो आप पाएंगे कि यह भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों की सूची में एक प्रमुख उपलब्धि है। सात सितंबर को चंद्रयान -2 के विक्रम लैंडर का इसरो के नियंत्रण कक्ष से संपर्क टूट गया था। यदि लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग सफल हो गयी होती तो भारत अमेरिका, रूस और चीन की सूची में शामिल हो सकता था। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि चंद्रयान 2 मिशन ने युवाओं और पुराने लोगों में एक जैसी जिज्ञासा पैदा की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान नूडल्स तैयार करने या पिज्जा खरीदने की तरह नहीं हो सकता, इसके लिए धैर्य की आवश्यकता होती है और ऐसे शोधों के परिणाम लोगों को दीर्घकालिक समाधान प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान में नाकामी नहीं होती सिर्फ प्रयास और प्रयोग होते हैं तथा सफलता होती है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए आप आगे बढ़ेंगे तो विज्ञान के क्षेत्र में भी आपको दिक्कत नहीं आएगी और जीवन में भी। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आवश्यकता को पहले आविष्कार की जननी माना जाता था, और अब आविष्कार ने ही जरूरतों की सीमाओं को बढ़ाया है। उन्होंने शोधकर्ताओं से प्रयोगों के दौरान दीर्घावधिक लाभ और समाधान पर विचार करने का आग्रह करते हुए उनसे कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानकों को ध्यान में रखें। उन्होंने कहा,‘‘विज्ञान में रूचि को वैज्ञानिक तरीके से रास्ता दिखाना चाहिए। इस जिज्ञासा को रास्ता दिखाना और उन्हें एक मंच देना हमारी जिम्मेदारी है। हमें मानवीय मूल्यों के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अनुसंधानों को आगे ले जाना होगा। हमारे देश ने दुनिया के कई शीर्ष वैज्ञानिक दिये हैं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसा लगता है कि वैज्ञानिक अनुसंधान ने युवा छात्रों में जिज्ञासा और प्रेरणा की एक नयी लहर पैदा की है। 

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