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बिहार में छठ व्रत के लिए सजे घाट, सूर्य को अर्घ्य देंगे श्रद्धालु

 Reported By: IANS
 Published : Oct 26, 2017 11:46 am IST,  Updated : Oct 26, 2017 11:46 am IST

गांव के घरों से लेकर शहरों के मोहल्लों तक में मनभावन लोक गीतों और पारंपरिक प्रसादों की खुशबू के बीच लोग सूर्य भगवान की अराधना में डूबे हुए हैं। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी भी परिवार के संग छठ पूजा कर रह

Chhath_puja- India TV Hindi
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पटना: सूर्योपासना के महापर्व छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान के तीसरे दिन गुरुवार की शाम व्रतधारी अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। इसे लेकर पटना सहित राज्य के सभी क्षेत्रों में तैयारियां पूरी कर ली गई है। इधर, बिहार के मुख्यमंत्री आवास पर भी छठ पर्व की धूम देखी जा रही है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी छठ कर रही हैं। बिहार की राजधानी पटना के गंगा घाट छठव्रतियों के लिए पूरी तरह तैयार हो चुके हैं। पटना में गंगा के कुल 101 घाटों पर छठपर्व का आयोजन किया जा रहा है। सभी घाटों पर रोशनी की पूरी व्यवस्था की गई है। व्रत रखने वालों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है।

गांव के घरों से लेकर शहरों के मोहल्लों तक में मनभावन लोक गीतों और पारंपरिक प्रसादों की खुशबू के बीच लोग सूर्य भगवान की अराधना में डूबे हुए हैं। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी भी परिवार के संग छठ पूजा कर रही हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री और राबड़ी के बेटे तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर व्रत का खाना बनाते हुए अपनी मां की फोटो भी साझा की। इधर, मुख्यमंत्री आवास पर भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भाभी छठ कर रही हैं।

छठ व्रत के दूसरे दिन बुधवार को 'खरना' के मौके पर राबड़ी देवी के आवास और मुख्यमंत्री आवास पर देर रात तक लोग प्रसाद ग्रहण करने के लिए पहुंचते रहे। राज्य के राज्यपाल सत्यपाल मलिक, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर खरना का प्रसाद ग्रहण किया। राजधानी पटना की सभी सड़कें रंग-बिरंगी दूधिया रोशनी और आकर्षक तोरण-द्वारों से सजी हुई हैं, जबकि गंगा घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं।

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को नहाय-खाय से प्रारंभ चार दिनों के इस अनुष्ठान में खरना के बाद छठव्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास करते हैं। गुरुवार शाम छठव्रती नदी, तालाबों सहित विभिन्न जलाशयों में पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। पर्व के चौथे और अंतिम दिन यानी शुक्रवार को उदीयमान सूर्य के अर्घ्य देने के बाद ही श्रद्धालुओं का व्रत समाप्त हो जाएगा। इसके बाद व्रती फिर अन्न-जल ग्रहण करेंगे।

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