1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. नहीं टूटा जवानों का हौसला, अभी भी लड़ने के लिए तैयार

नहीं टूटा जवानों का हौसला, अभी भी लड़ने के लिए तैयार

 Written By: Bhasha
 Published : Apr 25, 2017 08:44 pm IST,  Updated : Apr 25, 2017 08:44 pm IST

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में नक्सली हमले में अपने 25 साथियों को खोने के बाद घायल जवान का हौसला नहीं टूटा है। जवान अभी भी नक्सलियों का मुकाबला करने के लिए तैयार है।

crpf jawan- India TV Hindi
crpf jawan

रायपुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में नक्सली हमले में अपने 25 साथियों को खोने के बाद घायल जवान का हौसला नहीं टूटा है। जवान अभी भी नक्सलियों का मुकाबला करने के लिए तैयार है।

पश्चिम बंगाल के सौरभ कुमार मलिक सीआरपीएफ के 74 वीं बटालियन का जवान है और अभी अस्पताल में भर्ती है। सौरभ उन जवानों में से हैं जिन्होंने सोमवार को नक्सलियों का मुकाबला किया है। इस घटना में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हुए हैं और सात अन्य घायल हुए हैं।

इस लड़ाई में सौरभ के बायें कंधे से गोली आरपार हो गई है और उनके पैर तथा आंख में भी चोटें आई हैं। लेकिन सौरभ का हौसला अभी भी बरकरार है। भाषा से विशेष बातचीत के दौरान सौरभ कहते हैं कि यदि उन्हें फिर मौका मिलेगा तो फिर जाएंगे लड़ने। वह अभी भी तैयार हैं।

सुकमा: नक्सली हमले की पूरी कहानी, जहां जवानों को धोखे से मारा गया

घायल जवान ने बताया कि सोमवार को उन्हें सड़क की सुरक्षा में तैनात किया गया था। वह लगभग एक सौ जवानों के साथ सुबह निर्माणाधीन सड़क की सुरक्षा में रवाना हुए थे। दोपहर के करीब वहां अचानक कुछ ग्रामीणों की आवाजाही हुई। एक ग्रामीण वहां मुंह में काला कपड़ा बांधकर घूम रहा था। इस दौरान उससे पूछा गया कि वह यहां क्या कर रहा है। तब उसने कहा कि वह शौच के लिए आया था। उसके बाद वह वहां से चला गया। वहां अन्य गांव वाले भी आना जाना कर रहे थे।

सौरभ कहते हैं कि अक्सर होता है कि जब जवान ड्यूटी पर निकलते हैं तब गांव वाले महुआ एकत्र करने और अन्य कार्यों से वहां आते जाते रहते हैं। ग्रामीणों की आवाजाही को भी जवानों ने रोज की तरह समझा। लेकिन कुछ देर बाद ही नक्सलियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। जिसका जवाब जवानों ने भी दिया। इसी दौरान कुछ जवान घायल हो गए। वहीं लड़ते समय सौरभ को भी गोली लगी। अन्य जवान लगातार गोलीबारी का जवाब देते रहे। इस दौरान वहां बड़ी संख्या में ग्रामीण थे जो लगातार हल्ला कर रहे थे।

जवान कहते हैं कि हमेशा होता आया है कि ग्रामीण नक्सलियों का साथ देते हैं। ड्यूटी के दौरान जो ग्रामीण वहां दिखाई देते हैं वह नक्सलियों के ही आदमी होते हैं। उनके पास हथियार नहीं होते इसलिए यह पता नहीं चल पाता कि वह नक्सली है या नहीं। हम उन्हें कुछ भी नहीं कर सकते हैं। हमें कहा गया है कि ग्रामीणों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत