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विज्ञान भवन में कृषि कानूनों पर सरकार और किसानों की 10वें दौर की बैठक जारी

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Jan 20, 2021 08:14 am IST,  Updated : Jan 20, 2021 02:58 pm IST

नए कृषि कानूनों पर किसानों की आपत्तियों के समाधान को लेकर सरकार के साथ किसान यूनियनों की नौ दौर की वार्ताएं बेनतीजा रही हैं और अगले दौर की वार्ता में मसले का हल निकलने की उम्मीद की जा रही है।

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कृषि कानूनों पर किसान यूनियनों के साथ 10वें दौर की बैठक आज, सरकार को सुलह की उम्मीद

नई दिल्ली: नए कृषि कानून (Farm) के विरोध में आंदोलनरत किसानों के नेताओं की सरकार के साथ 10वें दौर की वार्ता शुरू हो गई है। किसान नेता बसों से विज्ञान भवन पहुंच चुके हैं। वहीं सरकार की ओर से बातचीत के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल भी विज्ञान भवन में मौजूद हैं। 

कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर किसान पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। नए कृषि कानूनों पर किसानों की आपत्तियों के समाधान को लेकर सरकार के साथ किसान यूनियनों की नौ दौर की वार्ताएं बेनतीजा रही हैं और अगले दौर की वार्ता में मसले का हल निकलने की उम्मीद की जा रही है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह ने तोमर मध्यप्रदेश के ग्वालियर में सोमवार को कहा था, "किसान यूनियनों से हर बार यही कहा गया है कि वे प्रावधान पर चर्चा करें, जिस प्रावधान से किसान को तकलीफ है उस पर विचार करने के लिए और उसमें संशोधन करने के लिए सरकार खुले मन से चर्चा कर रही है और करना चाहती है मगर यूनियन की तरफ से प्रावधान पर चर्चा नहीं हो पा रही है, इसलिए गतिरोध जारी है।" उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि अगले दौर की बैठक में किसान यूनियन विकल्पों पर चर्चा करेंगे तो समाधान का रास्ता निकलेगा।

सरकार और किसान संगठनों के बीच पिछली बैठक बेनतीजा रही थी। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री पुरषोत्तम रूपाला ने कहा था, ‘‘जब किसान हमसे सीधी बात करते हैं तो अलग बात होती है लेकिन जब इसमें नेता शामिल हो जाते हैं, अड़चनें सामने आती हैं। अगर किसानों से सीधी वार्ता होती तो जल्दी समाधान हो सकता था।’’ उन्होंने कहा कि चूंकि विभिन्न विचारधारा के लोग इस आंदोलन में प्रवेश कर गए हैं, इसलिए वे अपने तरीके से समाधान चाहते हैं। उन्होंने कहा था, ‘‘दोनों पक्ष समाधान चाहते हैं लेकिन दोनों के अलग-अलग विचार हैं। इसलिए विलंब हो रहा है। कोई न कोई समाधान जरूर निकलेगा।’’ 

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