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जीजेएम बंद गैरकानूनी, सरकार कड़े कदम उठाएगी: ममता बनर्जी

 Written By: Bhasha
 Published : Jun 09, 2017 02:48 pm IST,  Updated : Jun 09, 2017 02:48 pm IST

जीजेएम सर्मथकों और पुलिस बल के बीच कल हुई झड़प के बाद मुख्यमंत्री ने यहीं रूकने का निश्चय किया है। उन्होंने कहा, हड़ताल और बंद हर दूसरे मुद्दे के लिए आहूत नहीं किए जा सकते। यह शांति का संदेश नहीं हो सकता है।

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दार्जीलिंग (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गोरखा जनमुक्ति मोर्चा :जीजेएम: द्वारा आहूत 12 घंटे लंबी हड़ताल को गैरकानूनी बताते हुए कहा है कि उन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी, जो इसमें हिस्सा ले रहे हैं। इस हड़ताल ने पर्वतीय क्षेत्र में जनजीवन को आज सुबह लगभग अस्त-व्यस्त कर दिया। अधिकतर दुकानें और बाजार बंद रहे। सड़कों से वाहन भी नदारद रहे। जीजेएम सर्मथकों और पुलिस बल के बीच कल हुई झड़प के बाद मुख्यमंत्री ने यहीं रूकने का निश्चय किया है। उन्होंने कहा, हड़ताल और बंद हर दूसरे मुद्दे के लिए आहूत नहीं किए जा सकते। यह शांति का संदेश नहीं हो सकता है। ये भी पढ़ें: कैसे होता है भारत में राष्ट्रपति चुनाव, किसका है पलड़ा भारी, पढ़िए...

मुख्यमंत्री ने आज सुबह क्षेत्र का मुआअना किया और हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा, मैं आज सुबह से क्षेत्र में घूम रही हूं। मैंने देखा है कि किस तरह से वाहनों में आग लगाई गई है। यहां कोई मुद्दा या घटना नहीं थी। हम पर्वतीय क्षेत्र में शांति एवं विकास चाहते हैं। सेना ने यहां अपना मोर्चा संभाल लिया है। कानून अपना काम करेगा। मुख्यमंत्री ने दार्जीलिंग में फंसे हुए पर्यटकों को आश्वस्त किया कि सरकार उन्हें मैदानी इलाकों में भेजने के लिए हरसंभव मदद करेगी। जीजेएम समर्थक पर्वतीय क्षेत्र के स्कूलों में बंगाली भाषा थोपे जाने सहित कई मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री से जब यह पूछा गया कि राज भवन की ओर विरोध मार्च का नेतृत्व करने वाले जीजेएम प्रमुख बिमल गुरूंग के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई करने का सरकार मन बना रही है तो इस पर उनका कहना था, पुलिस और कानून अपना काम करेंगे। कोई भी व्यक्ति कानून से उपर नहीं है। सरकार बहुत सख्त है। सरकार उन सभी के खिलाफ कार्रवाई करेगी जो यह तोडफोड़ कर रहे हैं। सरकार ने कल रात गैर जमानती धारा के तहत दार्जीलिंग सदर थाने में गुरूंग और जीजेएम महासचिव रोशन गिरी के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। वहीं, गुरूंग ने खुद को आज पर्वतीय क्षेत्र का मुख्यमंत्री बताया और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को क्षेत्र में प्रदर्शन रोकने की चुनौती दी।

उन्होंने कहा, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के तौर पर वह अपनी शक्ति दिखाने की कोशिश कर रही हैं लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि मैं गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन :जीटीए: का निर्वाचित सदस्य हूं। मैं पर्वतीय क्षेत्र का मुख्यमंत्री हूं। गुरूंग ने कहा कि वह सेना की तैनाती और पर्वतीय क्षेत्र मेें पुलिस द्वारा किए जा रहे कथित अत्याचार को लेकर सीधे केंद्र से बात करेगे। उन्होंने कहा, मैं केंद्र से बात करूंगा, हम लोग राजग के सहयोगी हैं। पहाड़ में पुलिस द्वारा निर्दोष लोगों पर किए गए अत्याचार की सारी जनकारी हम उन्हें देंगे। जीजेएम समर्थकों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद दार्जीलिंग शहर में कल सेना की दो टुकड़ी तैनात की गई है।

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आखिर भारत में इसे क्यों कहा जाता है ‘उड़ता ताबूत’?

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