नई दिल्ली: सरकार द्वारा अपने वादे के अनुरूप घर उपलब्ध न कराए जाने से नाराज कठपुतली कॉलोनी के लोगों ने दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के सिविल लाइंस स्थित घर के बाहर प्रदर्शन किया। घर की मांग कर रहे इन लोगों ने यहां भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है। संसद भवन से महज 6 किमी दूर स्थित कठपुतली कॉलोनी में देश के हजारों नागरिक बेहद नारकीय स्थिति में गंदगी, कूड़ा, खुले शौच और अन्य तमाम प्रकार की गंदगियों के बीच जीने को मजबूर हैं। 40 साल पुरानी इस कॉलोनी में राजस्थान की सबसे पुरानी कठपुतली परंपरा से जुड़े करीब 2800 परिवार यहां रहते हैं।
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दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने 2004 में नरेला और द्वारका की तरह ही इस इलाके के झुग्गीवासियों को बेहतर जगह पर बसाने की योजना बनाई थी। इस योजना का उद्देश्य दिल्ली को झुग्गी मुक्त बनाकर यहां रहने वाले लोगों को स्वच्छ व सुरक्षित घर उपलब्ध कराना है। यह योजना 7 साल बीत जाने के बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। डीडीए ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत इस एरिया का विकास करने के लिए 2008 में प्राइवेट डिवेलपर्स से टेंडर मांगे थे। इसके लिए 8 डिवेलपर्स का चुनाव प्रॉजेक्ट की बोली लगाने के लिए किया गया। अंत में यह प्रॉजेक्ट एक डिवेलपर को दिया गया।

बताया जा रहा है कि डीडीए के अधिकारियों की सुस्ती भी इन सारी समस्याओं का बड़ा कारण रही है। यहां के रहने वाले सरकार से लिखित में घर देने की मांग कर रहे हैं और इनकी योजना अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का घेराव करने की भी है। ‘कठपुतली कॉलोनी’ के लोग बस सरकार से एक ऐसे घर और स्वच्छ वातावरण की मांग कर रहे हैं, जहां वे शांतिपूर्वक अपना जीवन जी सकें।