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भारत ने ‘विस्तारित पड़ोसी’ मुल्कों के साथ संबंधों को और मजबूत किया: पीएम मोदी

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Aug 15, 2020 06:26 pm IST,  Updated : Aug 15, 2020 06:26 pm IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि पड़ोसी सिर्फ वो ही नहीं है जिनसे भौगोलिक सीमाएं मिलती हैं, बल्कि वे भी हैं जिनसे दिल मिलते हैं। उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि हाल के वर्षों में भारत ने ‘विस्तारित पड़ोसी’ मुल्कों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत किया है।

India further strengthens relations with 'extended neighbor' countries: PM Modi- India TV Hindi
India further strengthens relations with 'extended neighbor' countries: PM Modi Image Source : PTI

नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि पड़ोसी सिर्फ वो ही नहीं है जिनसे भौगोलिक सीमाएं मिलती हैं, बल्कि वे भी हैं जिनसे दिल मिलते हैं। उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि हाल के वर्षों में भारत ने ‘विस्तारित पड़ोसी’ मुल्कों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत किया है। लाल किले की प्राचीर से 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशवासियों को संबोधित करते हुए मोदी ने जहां चीन और पाकिस्तान का जिक्र बगैर देश की संप्रभुता को चुनौती देने के लिए दोनों पड़ोसी मुल्कों को कड़ा संदेश दिया वहीं दक्षिण एशिया, पश्चिम एशिया और आसियान देशों के साथ बढ़ती प्रगाढ़ता का भी विस्तार से उल्लेख किया। 

उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ चाहे वो हमसे जमीन से जुड़े हों या समुद्र से अपने संबंधों को सुरक्षा, विकास और विश्‍वास की साझेदारी के साथ जोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘भारत का लगातार प्रयास है कि अपने पड़ोसी देशों के साथ हम अपने सदियों पुराने सांस्‍कृतिक, आर्थिक और सामाजिक रिश्‍तों को और गहराई दें।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि दक्षिण एशिया में दुनिया की एक-चौथाई जनसंख्‍या रहती है और संयोग व सहभागिता से इतनी बड़ी जनसंख्‍या के विकास और समृद्धि की अनगिनत संभावनाएं पैदा कर सकते हैं। इस क्षेत्र के देशों के सभी नेताओं व जनसमूह का विकास और प्रगति प्रति अहम जिम्‍मेदारी का एहसास कराते हुए मोदी ने उनसे इसे निभाने का आह्वान किया। 

उन्होंने कहा, ‘‘इस पूरे क्षेत्र में जितनी शांति होगी, जितना सौहार्द होगा, उतनी ही ये मानवता के काम आएगी, मानवता के हित में होगा पूरी दुनिया का हित इसमें समाहित है।’’ मोदी ने कहा कि आज पड़ोसी सिर्फ वो ही नहीं है जिनसे हमारी भौगोलिक सीमाएं मिलती हैं, बल्कि वे भी हैं जिनसे हमारे दिल मिलते हैं जहां रिश्‍तों में समरसता होती है, मेलजोल रहता है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है बीते कुछ समय में भारत ने विस्तारित पड़ोस के सभी देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत किया है।’’ 

पश्चिम एशिया के देशों से आर्थिक संबंध खासकर ऊर्जा क्षेत्र में भागीदारी को बेहद महत्‍वपूर्ण बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन देशों से राजनैतिक, आर्थिक और मानवीय संबंधों की प्रगति में कई गुना तेजी आई है जबिक विश्‍वास अनेक गुना बढ़ गया है। उन्होंने कहा, ‘‘इसी प्रकार हमारे पूर्व के आसियान देश जो हमारे समुद्रवर्ती पड़ोसी भी हैं, वो भी हमारे लिए बहुत विशेष महत्‍व रखते हैं। इनके साथ भारत का हजारों वर्ष पुराना धार्मिक और सांस्‍कृतिक संबंध है।’’ 

उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म की परम्‍पराएं हमें उनसे जोड़ती है। आज भारत इन देशों के साथ, सिर्फ सुरक्षा क्षेत्रों में नहीं बल्कि समुद्री संपदा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा रहा है। पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्य के रूप में भारत को 192 में से 184 देशों के मिले समर्थन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह दर्शाता है कि आज दुनिया का भारत पर विश्वास और मजबूत हुआ है। 

उन्होंने कहा, ‘‘विश्व के 192 में से 184 देशों का भारत को समर्थन मिलना हर हिंदुस्तानी के लिए गर्व की बात है। विश्व में कैसे हमने अपनी पहुंच बनाई है यह उसका उदाहरण है। यह तभी संभव होता है जब भारत खुद मजबूत हो, भारत सशक्त हो, भारत सुरक्षित हो।’’ 

मोदी ने अपने संबोधन के मौके पर चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उन्हें कड़ा संदेश दिया और बल देकर कहा कि भारत आतंकवाद और विस्तारवाद का कड़ाई से मुकाबला कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘नियंत्रण रेखा (एलओसी) से लेकर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) तक देश की संप्रभुता पर जिस किसी ने आंख उठाई है, देश ने देश की सेना ने उसका उसी की भाषा में जवाब दिया है।’’ 

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