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पड़ोसियों से खतरे नहीं हुए कम, फिर इंडियन आर्मी के स्टाफ में कमी क्यों

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 09, 2016 04:12 pm IST,  Updated : May 09, 2016 06:27 pm IST

भारतीय सेना में नॉन कॉम्बैट सेक्शन में कर्मचारियों की संख्या कम करने की तैयारी कर रहे हैं।

INDIAN ARMY- India TV Hindi
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नई दिल्ली: भारतीय सेना में नॉन कॉम्बैट सेक्शन में कर्मचारियों की संख्या कम करने की तैयारी कर रहे हैं। भारतीय सेना के प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग ने

इस पर एक टीम का गठन किया है इस फैसले की सबसे बड़ी वजह सेना पर किए जाने वाले खर्च को कम करना और सेना को एक सही आकार देने की है।

आर्मी चाफ ने इस मामले में अगल्त तक अपनी सिफारिशें देने की बात की है। सेना में स्टाफ कम करने का रोडमैप 3 महीने में तैयार किया जाएगा।
 स्टडी में सबसे ज्यादा फोकस इस बात पर किया जाएगा कि लॉजिस्टिक सपोर्ट को कम करके भी उसका बेहतर इस्तेमाल कॉम्बैट फोर्स के लिए कैसे किया जा सकता है। इसके साथ-साथ मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम की भी जांच की जाएगी। कम्युनिकेशन स्किल्स पर ज्यादा फोकस किया जाएगा। हथियारों की जांच और सिविलियन वर्क फोर्स को कम करना भी इस स्टडी का अहम हिस्सा होगा।

भारतीय सेना में इस समय एक डिवीजन में 14 हजार जवान है। और साथ ही उन्हें सपोर्ट देने के लिए 3 हजार का स्टाफ है। भारतीय सेना में फिलहाल 10.2 लाख कर्मचारी हैं। सेना में 49,631 ऑफिसर होने चाहिए, लेकिन 9,106 अफसर कम हैं। वर्ष 2005 से 2013 के बीच आर्मी में 14 हजार नौकरियां पहले ही कम की जा चुकी हैं। जनरल सुहाग का यह आदेश पीएम मोदी के उस बयान के पांच महीने बाद आया है, जब उन्होंने कहा था कि आधुनिकीकरण और सेना को एक साथ बढ़ाना मुश्किल काम है और गैर जरूरी लक्ष्य है।

पेंशन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसकी वजह से सेना के पास आधुनिक तकनीक खरीदने के लिए बहुत कम बजट बच रहा है। इस साल अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों के लिए सरकार के पास 80 हजार करोड़ रुपये का बजट है, जो पिछले साल से करीब 14 हजार करोड़ रुपए कम है।

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