कोलकाता
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एजेंट ने इस इंजीनियर से सऊदी अरब में ऑटोमोबिल सेक्टर में एक नौकरी दिलाने का वादा किया था। जब यह इंजीनियर 15 मई को रियाद पहुंचा तो उसे सऊदी अरब के नईफ को गुलाम की तरह बेच दिया गया। खबरों के मुताबिक, सऊदी में वह अपने मालिक के घर की देखभाल करता था और घास काटता था। उसने अपने परिजनों को बताया कि उसका मालिक उसका यौन शोषण भी करता है। किसी तरह वह अपने मालिक के घर से भागने में कामयाब रहा और उसके बाद उसने भारतीय दूतावास से संपर्क किया। अधिकारियों ने फिलहाल उसे एक एनजीओ को सौंप दिया है।
बताया जाता है कि जयंत ने इससे पहले भी एक बार भागने की कोशिश की थी, तब वह पकड़ लिया गया था। जयंत ने आरोप लगाया कि इसके बाद उसके 'मालिक' ने उसे बुरी तरह पीटा था। जयंत जब दूसरी बार भागा तो उसके 'मालिक' ने जंयत पर 10,000 रियाल की चोरी का इल्जाम लगा कर उसे पुलिस से पकड़वा दिया। बाद में जयंत को छुड़वाने के लिए एजेंट्स ने उसकी बड़ी बहन गौरी से 35,000 रुपयों की मांग की। यह पैसे देने के बाद ही जयंत को 27 अक्टूबर को जेल से छोड़ा गया।
ऑटोमोबिल इंजीनियर जयंत बिस्वास के परिजनों ने उसे सऊदी अरब से वापस लाने की खातिर मदद के लिए विदेश मंत्रालय से गुहार लगाई है हालांकि मंत्रालय ने अब तक उन्हें कोई जवाब नहीं दिया है। गौरी ने कहा, 'हम भारत सरकार से मेरे भाई को वापस लाने के लिए कदम उठाने की अपील करते है।' गौरी के अनुसार, इस साल के शुरू में जयंत नई दिल्ली और मुंबई के एजेंटों के संपर्क में था, जिन्होंने उसे सऊदी अरब में ऑटोमोबिल सेक्टर में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उससे एक लाख रुपये लिए थे।