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'वेमुला के भाई को नौकरी' के खिलाफ याचिका पर AAP से जवाब तलब

 Written By: IANS
 Published : May 17, 2016 07:57 pm IST,  Updated : May 17, 2016 07:59 pm IST

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायलय ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार से उसके खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर जवाब मांगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जनवरी में आत्महत्या करने

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नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायलय ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार से उसके खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर जवाब मांगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जनवरी में आत्महत्या करने वाले हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित शोधछात्र रोहित वेमुला के भाई को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की पेशकश का दिल्ली सरकार का फैसला 'राजनीति से प्रेरित' था।

दिल्ली सरकार ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.रोहिणी तथा न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ से कहा कि रोहित वेमुला के भाई राजा चैतन्य कुमार वेमुला ने सरकार की पेशकश को न मानने की सूचना दी है। दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा, "राजा चैतन्य को चार अप्रैल को लिखे गए एक पत्र के माध्यम से दिल्ली प्रशासनिक सेवा में अवर श्रेणी लिपिक (ग्रेड-4) की नौकरी की पेशकश की गई थी, जिसे स्वीकार करने से उन्होंने इनकार कर दिया, इसलिए हम अपना फैसला वापस लेने जा रहे हैं।"

न्यायालय ने सरकार को याचिका पर हलफनामा दाखिल करने को कहा और मामले की सुनवाई की अगली तारीख 13 जुलाई मुकर्रर की। अधिवक्ता अवध कुमार कौशिक ने अपनी याचिका में सरकार के फैसले को कानून, नीति व दिशानिर्देशों के बिना पूर्णत: राजनीति से प्रेरित, अवैध, मनमाने ढंग से, भेदभाव पूर्ण व अन्यायोचित बताते हुए खारिज करने की मांग की।

याचिका में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के शोधछात्र रोहित वेमुला के भाई राजा को एक क्लर्क की नौकरी देने को लेकर केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप की सरकार के विवेक पर सवाल उठाया गया है। याचिका में कहा गया, "छात्र ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी में आत्महत्या की, जिसका दिल्ली से कोई लेना-देना नहीं था और निश्चित तौर पर वह दिल्ली में सरकारी नौकरी नहीं कर रहा था। इसलिए सरकार द्वारा की गई पेशकश पूरी तरह राजनीति से प्रेरित, पूर्वाग्रहपूर्ण तथा अवैध है।"

याचिका के मुताबिक, यह मामला न तो किसी विशेष श्रेणी का है और न ही किसी प्रकार की शहादत व किसी अच्छे कारण के लिए जीवन के बलिदान का है। यह हैदराबाद में सिर्फ एक आत्महत्या का मामला है, इसलिए आप का यह फैसला न तो कोई समझदारी भरा निर्णय है और न ही सार्वजनिक कल्याण के हित में है। याचिका में नियुक्ति की प्रक्रिया को यह कहते हुए चुनौती दी गई है कि अगर दिल्ली सरकार को प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी जाती है, तो इसका गलत संदेश जाएगा।

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