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किसान हिंसा: पुलिस की कई गाड़ियों में तोड़फोड़, पुलिस को पीछे हटना पड़ा

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Jan 26, 2021 05:24 pm IST,  Updated : Jan 26, 2021 05:32 pm IST

दिल्ली के नागलोई इलाके में प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस की कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थराव भी किया जिस वजह से पुलिस को पीछे हटना पड़ा है।

किसान हिंसा: पुलिस की कई गाड़ियों में तोड़फोड़, पुलिस को पीछे हटना पड़ा- India TV Hindi
किसान हिंसा: पुलिस की कई गाड़ियों में तोड़फोड़, पुलिस को पीछे हटना पड़ा Image Source : PTI

नई दिल्ली: दिल्ली के नागलोई इलाके में प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस की कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थराव भी किया जिस वजह से पुलिस को पीछे हटना पड़ा है। वहीं पुलिस ने मंगलवार को लगभग 90 मिनट तक चली अफरातफरी के बाद प्रदर्शनकारी किसानों को लालकिला परिसर से हटा दिया। किसान अपनी ट्रैक्टर परेड के निर्धारित मार्ग से हटकर इस ऐतिहासिक स्मारक तक पहुंच गए थे जहां उन्होंने अपने झंडे लगा दिए। लालकिले पहुंचे प्रदर्शनकारी उस ध्वज-स्तंभ पर भी अपना झंडा लगाते दिखे जिसपर प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस के दिन राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। इन प्रदर्शनकारियों में ‘निहंग’ भी शामिल थे। बाद में, पुलिस ने लालकिला परिसर को खाली कराने के लिए लाठीचार्ज किया। 

इससे पहले लगातार उद्घोषणा की जा रही थी कि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से लालकिले से हट जाएं। इससे पहले, प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर परेड के निर्धारित मार्ग से हटकर आईटीओ पहुंच गए। जब उन्होंने वहां से लुटियंस क्षेत्र की ओर बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। किसानों ने ट्रैक्टर परेड के निर्धारित समय से काफी पहले ही दिल्ली के भीतर बढ़ना शुरू कर दिया था। दिल्ली पुलिस ने नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों को इस शर्त के साथ ट्रैक्टर परेड की अनुमति दी थी कि वे राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड के समाप्त होने के बाद निर्धारित मार्गों से ही अपनी रैली निकालेंगे।

संयुक्त किसान मोर्चा ने ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा से खुद को अलग किया

किसान संघों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा में शामिल लोगों से मंगलवार को खुद को अलग कर लिया और आरोप लगाया कि कुछ "असामाजिक तत्वों ने घुसपैठ कर ली है, अन्यथा आंदोलन शांतिपूर्ण था। " संघ ने "अवांछित "और "अस्वीकार्य" घटनाओं की निंदा की है और खेद जताया है। कुछ किसान समूहों द्वारा पहले से तय रास्ता बदलने के बाद परेड हिंसक हो गई है। संयुक्त किसान मोर्चा में किसानों के 41 संघ हैं। वह दिल्ली की कई सीमाओं पर केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन की अगुवाई कर रहा है। 

किसान संगठन ने एक बयान में कहा, "आज के किसान गणतंत्र दिवस परेड में अभूतपूर्व भागीदारी के लिए हम किसानों को धन्यवाद देते हैं। हम अवांछनीय और अस्वीकार्य घटनाओं की निंदा करते और खेद भी जताते हैं जो आज हुई हैं और ऐसे कृत्यों में शामिल लोगों से खुद को अलग करते हैं।" बयान में कहा गया है, " हमारे सभी प्रयासों के बावजूद, कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने मार्ग का उल्लंघन किया और निंदनीय कृत्यों में शामिल हुए। असामाजिक तत्वों ने घुसपैठ की है, अन्यथा आंदोलन शांतिपूर्ण था। हमने हमेशा यह माना है कि शांति हमारी सबसे बड़ी ताकत है और किसी भी तरह का उल्लंघन आंदोलन को नुकसान पहुंचाएगा।" 

संयुक्त किसान मोर्चा का बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय राजधानी के कई स्थानों पर किसानों और पुलिस के बीच झड़प हुई हैं। एक ट्रैक्टर के पलट जाने के बाद एक किसान की दिल्ली के आईटीओ पर मौत हो गई। पुलिस ने शहर के कई स्थानों पर किसानों को काबू करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। बयान में कहा गया है, " हम अपने आप को ऐसे सभी तत्वों से अलग करते हैं जिन्होंने हमारा अनुशासन तोड़ा है। हम परेड के मार्ग और नियमों पर चलने के लिए और किसी भी हिंसक कृत्य या ऐसी किसी भी चीज़ में लिप्त नहीं होने की सभी से दृढ़ता से अपील करते हैं जो राष्ट्रीय प्रतीकों और गरिमा को प्रभावित करती है। हम सभी से अपील करते हैं कि वे ऐसे किसी भी कृत्य से दूर रहें।" 

बयान में कहा गया है, "हम आज तय की गई कई परेडों के संबंध में सभी घटनाओं की पूरी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं और जल्द ही पूरा बयान साझा करेंगे। हमारी सूचना के मुताबिक, कुछ खेदजनक उल्लंघनों के अलावा परेड योजना के अनुसार शांतिपूर्ण निकाली जा रही है।" हाथों में डंडे, तिरंगा व किसान संघ के झंडे थामें हजारों किसानों ने ट्रैक्टरों पर सवार होकर बैरिकेड तोड़ दिए और कई स्थान पर पुलिस के साथ संघर्ष किया तथा लाल किले को घेर लिया एवं झंडे फहराने वाले खंभे पर चढ़ गए। अधिकतर पंजाब, हरियाणा व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान 28 नवंबर से दिल्ली की अलग अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि तीन कृषि कानूनों को रद्द किया जाए और एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए।

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