नई दिल्ली: चक्रवाती तूफान ‘कोमेन’ की वजह से पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मूसलाधार बारिश हो रही है। इस तूफान का नाम थाई शब्द कोमेन से पड़ा है, जिसका मतलब होता है बेशकीमती पत्थर।
तूफानों के नाम रखने की प्रक्रिया
दरअसल 20 सदी की शुरुआत में एक आस्ट्रेलियाई मौसम विज्ञानी ने तूफानों के नाम तत्कालीन भ्रष्ट नेताओं के नाम पर रखने का चलन शुरू किया था। यहीं से तुफानों के नामकरण का सिलसिला शुरू हुआ।
द्वितिय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी नौसेना के जवानों और मौसम विज्ञानियों ने तूफानों को अपनी प्रेमिकाओं और पत्नियों के नाम से पुकारा।
चक्रवातों का नाम देने की परंपरा शुरू हुई ताकि इसकी तुरंत पहचान हो सके और समय रहते राहत-बचाव का कार्य किया जा सके।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन की अंतरराष्ट्रीय संस्था एक कड़ी प्रक्रिया के द्वारा तूफानों के वास्तविक नाम चुनती है। इनके नाम छ: अलग-अलग लिस्ट में से रोटेट करके रखे जाते हैं।
हर लिस्ट मे 21 नाम होते हैं, जिन्हें अल्फाबेट के हर वर्ण (Q, U, X, Y और Z को छोड़कर) से शुरू किया जाता है। इसके नियम हैं कि नाम छोटे व अंग्रेजी, स्पैनिश या फ्रेंच भाषा के होने चाहिए।
मध्य और उत्तरी अमेरिकी के अलावा कैरेबियन भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए। यह लिस्ट हर छ: साल में रिसाइकल की जाती है। जो तूफान ज्यादा विध्वंसकारी होते हैं यानी जिनमें जान-माल की अधिक हानि होती है उन्हें सूची से रिटायर कर दिया जाता है, ताकि भविष्य में उनका संदर्भ लेने में आसानी हो।
भारतीय उपमहाद्वीप में भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) क्षेत्रीय विशेषीकृत मौसम केद्र होने की वजह से भारत के अलावा सात अन्य देशों बंगलादेश, मालदीव, म्यांमार, पाकिस्तान, थाईलैंड एवं श्रीलंका को मौसम संबंधी परामर्श जारी करता है।
तूफानों के नामकरण के लिए भारत ने इन देशों से भी नाम मांगे थे। भारतीय उपमहाद्वीप के लिए अब तक कुल 64 नामों की सूची तैयार की गई है जिनमें से 22 का इस्तेमाल हो चुका है।
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