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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का फैसला: देश में 5 जगहों पर खुलेंगे दारुल कजा

 Reported By: Bhasha
 Published : Jul 15, 2018 08:59 pm IST,  Updated : Jul 15, 2018 08:59 pm IST

दारुल कजा को लेकर खड़े हुए हालिया विवाद पर जीलानी ने कहा, यह बेवजह का विवाद है। यह झूठी खबर फैलाई गई कि हर जिले में दारुल कजा खुलने जा रहा है।

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नई दिल्ली: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पास देश के अलग-अलग हिस्सों से 10 'दारुल कजा' (मध्यस्थता परिषद) खोलने के प्रस्ताव आए हैं जिनमें से 5 को जल्द खोलने का फैसला किया गया है। बोर्ड की आज हुई बैठक में यह भी फैसला किया गया है कि अयोध्या मामले की सुनवाई को उच्चतम न्यायालय की बड़ी पीठ के पास ले जाने की कोशिश की जाएगी।

बोर्ड की बैठक में आज समान नागरिक संहिता, दारुल कजा, अयोध्या मामले और कुछ अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद बोर्ड के सदस्य जफरयाब जीलानी ने 'भाषा' को बताया, ''देश से 10 जगहों से दारुल कजा खोलने का लोगों ने आग्रह किया है। इनमें से पांच को खोलने की इजाजत दे दी गई है।''

उन्होंने कहा कि पांच अन्य प्रस्तावों पर छानबीन के बाद फैसला किया जाएगा। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में दारुल कजा खोले जाने को मंजूरी दी गई है।

दारुल कजा को लेकर खड़े हुए हालिया विवाद पर जीलानी ने कहा, ''यह बेवजह का विवाद है। यह झूठी खबर फैलाई गई कि हर जिले में दारुल कजा खुलने जा रहा है।'' उन्होंने कहा, ''कुछ लोग इसे अदालत के तौर पर पेश कर रहे हैं जो बिल्कुल गलत है। यह महज एक मध्यस्थता परिषद है जो दीवानी से जुड़े मामलों पर दो पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश करती है।''

बोर्ड ने यह फैसला भी किया कि वह अगले कुछ दिनों के भीतर समान नागरिक संहिता को लेकर विधि आयोग के सवालों का जवाब देगा और इसके लिए उसने सात सदस्यीय एक समिति भी बनाई है। बोर्ड के सदस्य कमाल फारूकी ने बताया, "बोर्ड की बैठक में यह फैसला किया गया है कि अगले एक सप्ताह या 10 दिन के भीतर हम समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग के प्रश्नों का जवाब देंगे।''

उन्होंने कहा, ''कई दूसरे समुदाय और वर्गों के लोग भी समान नागरिक संहिता का विरोध कर रहे हैं। खुद आयोग के अध्यक्ष कह चुके हैं कि यह संभव नहीं है। भारत जैसे विविध देश में सभी एकरूपता में नहीं समेटा जा सकता।''

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