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आर्मी चीफ जनरल रावत ने कहा, नेपाल और भूटान को भारत की ओर झुकाव रखना होगा

 Reported By: Bhasha
 Published : Sep 16, 2018 10:04 pm IST,  Updated : Sep 16, 2018 10:04 pm IST

सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने रविवार को कहा कि नेपाल और भूटान जैसे देशों को भौगोलिक स्थिति की वजह से भारत के प्रति झुकाव रखना होगा।

Nepal, Bhutan have to be inclined towards India, says General Bipin Rawat | PTI File- India TV Hindi
Nepal, Bhutan have to be inclined towards India, says General Bipin Rawat | PTI File

पुणे: सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने रविवार को कहा कि नेपाल और भूटान जैसे देशों को भौगोलिक स्थिति की वजह से भारत के प्रति झुकाव रखना होगा। जनरल रावत बहुपक्षीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग-क्षेत्र प्रशिक्षण सैन्य अभ्यास के लिए बंगाल की खाड़ी की पहल (बिम्सटेक-माइलेक्स 18) के समापन समारोह से इतर पुणे में संवाददाताओं को संबोधित कर रहे थे। चीन की ओर नेपाल के बढ़ते झुकाव पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए रावत ने कहा, ‘नेपाल और भूटान जैसे देशों को भूगोल की वजह से भारत की ओर झुकाव रखना होगा। भूगोल भारत की ओर झुकाव की वकालत करता है और जहां तक गठजोड़ (चीन के साथ) की बात है तो यह अस्थाई चीज है।’

पाकिस्तान और अमेरिका के उदाहरण देते हुए जनरल ने दावा किया कि इस तरह के संबंध अस्थाई हैं और वैश्विक स्तर पर बदलते परिदृश्य के साथ बदलने वाले हैं। उन्होंने कहा, ‘इस बात का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध हैं। ये अब 70 साल पहले की तरह नहीं हैं। इसलिए हमें इन सभी मुद्दों को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। हमें अपने देश को मजबूत रखने पर ध्यान देना होगा।’ रावत ने कहा कि भारत का नेतृत्व पड़ोसी देशों के साथ संबंध विकसित करने में विश्वास करता है। उन्होंने कहा, ‘हमारा देश बड़ा है और अगर हम अगुवाई करते हैं तो सब अनुसरण करेंगे। इसलिए हम इस ओर बढ़े हैं।’

उन्होंने दावा किया कि भारत अर्थव्यवस्था के चलते चीन को प्रतिस्पर्धी मानता है। रावत ने कहा, ‘वे बाजार की ओर देख रहे हैं और हम भी। दोनों में प्रतिस्पर्धा है। जो भी बेहतर करेगा, जीतेगा।’ भविष्य में बिम्सटेक वार्ता में अवैध आव्रजन का मुद्दा जोड़े जाने की संभावना के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह नयी बात नहीं है। रावत ने कहा, ‘हमेशा से आर्थिक रूप से कमजोर देश से मजबूत देश की ओर विस्थापन होता है। इसलिए समान प्रगति महत्वपूर्ण है। जब तक विकास का समान और सही वितरण नहीं होता, यह बात खत्म नहीं होने वाली।’

इससे पहले रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने सैन्य समारोह में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि नेपाल ने पर्यवेक्षक भेजकर इसमें भाग लिया है। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने (नेपाल ने) पिछले सभी सम्मेलनों में भाग लिया है। इस बार यह सैन्य अभ्यास है और इसी दौरान उनकी कमान बदल गई। नेपाल ने अपने पर्यवेक्षक भेजे हैं अत: उनकी ओर से भागीदारी है। हमें अन्य किसी कोण से देखने की जरूरत नहीं है।’ सप्ताह भर चलने वाले सैन्य अभ्यास में भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार और भूटान की सैन्य टुकड़ियां भाग ले रही हैं, वहीं नेपाल और थाइलैंड ने इसमें भाग नहीं लिया है और पर्यवेक्षकों को भेजा है।

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