बलरामपुर: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में पोलियो का एक संदिग्ध मामला पाये जाने पर स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन को भेज दी गयी है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एस. आई. जैदी ने आज यहां बताया कि गैंसड़ी विकास खंड के पडरौना गांव की रहने वाली शहनाज के छह साल के बेटे महताब को एक हफ्ते पहले बुखार हुआ था। उसके बाद से उसके दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डाक्टरों ने पोलियो की आशंका जताते हुए उसका इलाज शुरू कर दिया है।
पोलियो मुक्त भारत के सपने को झटका देने वाले इस मामले की रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को भेज दी गयी है। बच्चे का इलाज किया जा रहा है। इस बीच, स्वास्थ्य राज्यमंत्री एस. पी. यादव ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। रिपोर्ट मिलते ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हैदराबाद में भी मिला था पोलियो वायरस
इससे पहले हैदराबाद रेलवे स्टेशन के पास से विशेषज्ञों को वैक्सीन डिराइव पोलियो वायरस (वीडीपीवी) का वायरस मिला था। इस वायरस का पता सीवेज वाटर के लैब टेस्ट के दौरान लगा था। वायरस का नाम वीडीपीवी टाइप-2 है। बता दें कि देश में 2010 के बाद पोलियो का कोई वायरस नहीं पाया गया था। लेकिन टेस्ट में इस वायरस का पता लगने के बाद राज्य सरकार काफी सतर्क हो गई थी।
इसे गंभीरता से लेते हुए तेलंगाना सरकार ने पोलियो के खिलाफ एक विशेष अभियान छेड़ने का फैसला किया था। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव राजेश्वर तिवारी ने बताया कि तेलंगाना के अंबरपेट से लिए गए सीवेज के पानी के नमूने की जब लैब मे जांच की गई तो उसमें "वैक्सीन ड्राइव्ड पोलियो वायरस-टाइप टू" प्रकार का वायरस पाया गया था।