राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में खतरनाक स्तर तक प्रदूषण होने के लिए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने केंद्र और दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि दोनों ने समय रहते इसकी रोकथाम के लिए क़दम नहीं उठाए।
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने दिल्ली सरकार से राजधानी में डीज़ल से चलने वाले 10 साल पराने वाहनों पर रोक लगाने को कहा है।
दिल्ली सरकार ने अपनी सफ़ाई में कहा कि हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में फ़सलें जलाने से दिल्ली में प्रदूषण फ़ैलता है। इस पर NGT ने कहा कि क्रॉप बर्निंग के आलावा दिल्ली मे प्रदूषण बढ़ने की कई और वजह है. क्या आपने उस पर कोई काम किया. एनजीटी ने कहा कि आप अभी तक 10 साल पुरानी डीजल गाडियों को अभी तक दिल्ली की सड़कों से नहीं हटा पाए है. हम अपने बच्चों और नौनिहालों को क्या दे रहे हैं? प्रदूषण जो उनके लिए जानलेवा है। हमे सोचना होगा।
एनजीटी ने कहा कि हमने खुद देखा है कि साउथ दिल्ली के कई इलाकों मे बिल्डर्स कंस्ट्रक्शन के दौरान नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं. उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है. कंस्ट्रक्शन के दौरान धूल प्रदूषण बढ़ाने का बड़ा कारण है. डस्ट, प्लास्टिक बर्निंग और कूड़े को जलाने को लेकर अभी तक एजेंसी क्या कर रही है.
ग़ौरतलब है कि बढ़ते प्रदूषण के चलते राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कुछ स्कूलों ने कल छुट्टी की घोषणा की है, जबकि कई स्कूलों ने सुबह की कक्षाएं रद्द कर दी हैं और विद्यार्थियों को मास्क पहनने के लिए कहा है।
विग्यान और पर्यावरण केंद्र (CSI) ने आज भारतीय मौसम विग्यान विभाग (IMD) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 17 साल में इस बार बहुत ही खराब दृश्यता के साथ सबसे ज्यादा धुंध है। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर दो नवंबर को पिछले 17 साल में धुंध का सबसे खराब स्तर दर्ज किया गया।
प्रदूषण पर नज़र रखने वाली संस्था System of Air Quality and Weather Forecasting and Research ने दिवाली से पहले ही चेतावनी दी थी कि आतिशबाजी की वजह से इस बार दिल्ली में बीते 3 साल में सबसे ज्यादा प्रदूषण होगा।
इस बीच दिल्ली और आसपास के राज्य में प्रदूषण की समस्या को लेकर केंद्रीय पर्यावरण सचिव ने दिल्ली समेत आसपास के 5 राज्यों के सचिवों के साथ बैठक की। बैठक में दिल्ली ,हरियाणा ,UP, पंजाब और राजस्थान के सचिव मौजूद।