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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज की, एक ही जेल में शिफ्ट किये गये चारो

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज कर दी है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: January 17, 2020 12:15 IST
गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति को भेजी निर्भया केस के दोषी की दया याचिका, एक ही जेल में शिफ्ट किये गये च- India TV Hindi
गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति को भेजी निर्भया केस के दोषी की दया याचिका, एक ही जेल में शिफ्ट किये गये चारों

नई दिल्ली:  निर्भया रेप और हत्या मामले के दोषियों में से एक मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने खारिज कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुकेश की मर्सी पिटीशन को बीती रात राष्ट्रपति भवन भेज दिया था। इससे पहले दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को फाइल भेजकर याचिका खारिज करने की सिफारिश की थी। बता दें, दिल्ली की एक कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप मामले के चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है और फांसी के लिए 22 जनवरी का दिन तय किया है।

इसी बीच निर्भया के हत्यारों को तिहाड़ जेल परिसर के कारावास नंबर तीन में स्थानांतरित कर दिया गया है जहां उन्हें फांसी पर लटकाया जाना है। यह वही तीन नंबर जेल है जिसमें फांसी-घर मौजूद है। इस बीच तिहाड़ जेल प्रशासन भी अपनी तैयारियों में जोर-शोर से जुटा है। मामले में आरोपी विनय शर्मा, अक्षय कुमार सिंह, मुकेश कुमार सिंह और पवन गुप्ता को 22 जनवरी को फांसी दी जानी थी।

ये चारों मुजरिम अब सिर्फ और सिर्फ फांसी घर में फांसी के फंदों के नीचे खड़े होकर ही मिल पायेंगे। वहां भी मगर एक दूसरे के बेहद करीब पहुंचने/ खड़े होने के बाद भी इन चारों में से कोई किसी को देख पाने की हालत में नहीं होगा। इसकी भी वजह है। इनकी काल-कोठिरियों से फांसी लगाने को ले जाते वक्त इनके चेहरे काले कपड़े से ढंक दिये जायेंगे। पांवों में बेड़ियां और पीछे की ओर मोड़कर हाथों में हथकड़ियां पड़ी होंगी। 

तिहाड़ जेल महानिदेशालय सूत्रों के मुताबिक, 'चारों को चूंकि एक ही समय पर फांसी के तख्ते पर ले जाकर खड़ा करना है। तो एक साथ ही काल-कोठरियों से फांसी घर तक पहुंचाने के लिए निकालना होगा। मगर उस वक्त बेहद सतर्कता और शांति बरती जायेगी। ताकि किसी भी मुजरिम के फांसी घर में पहुंचने की आहट या भनक किसी दूसरे तक न पहुंचने पाये। इसके पीछे प्रमुख वजह होगी, ऐन वक्त पर एक साथ होते ही कहीं ये चारों कोई बखेड़ा न खड़ा कर दें।'

हांलांकि एक साथ चूंकि तिहाड़ जेल के फांसी घर में चार-चार मुजरिमों को पहली बार फांसी लग रही है। इसलिए यह भी पहला मौका होगा जब, तिहाड़ जेल के फांसी घर में जेल अधिकारी- कर्मचारियों, तमिलनाडू स्पेशल पुलिस के हथियारबंद जवानों की तादाद भी कहीं ज्यादा होगी। मतलब फांसी घर में होगी तो शमशान सी शांति, मगर भीड़ इससे पहले लगाई गयी फांसी के मौकों से कहीं ज्यादा होगी।

फांसी कोठरी में अंदर घुसते ही लेफ्ट साइड में फांसी का तख्ता है। इसमें फांसी देने वाले प्लैटफॉर्म के नीचे एक बेसमेंट बनाया गया है। बेसमेंट में जाने के लिए करीब 20 सीढ़ियां हैं। जिनसे नीचे उतरकर फांसी पर लटकाए गए कैदी का शव बाहर निकाला जाता है। फांसी कोठरी के ऊपर कोई छत नहीं है। इससे नजदीक एक छोटा सा पार्क भी बनाया गया है। जहां इन 16 सेल में रखे जाने वाले खतरनाक कैदी सैर करते हैं।

क्यों नहीं हो सकती 22 जनवरी को फांसी?

पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया केस के दोषी मुकेश सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि 22 जनवरी को फांसी नहीं हो सकती है। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलील मानते हुए कहा कि दोषियों को 22 जनवरी को फांसी नहीं दी जा सकती क्योंकि उनकी दया याचिका लंबित है। कोर्ट ने कहा कि दया याचिका लंबित होने के कारण डेथ वॉरंट पर स्वतः ही रोक लग गई है।

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