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निर्भया केस: दो दोषियों की क्यूरेटिव पेटिशन पर 14 जनवरी को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में मौत की सजा का सामना कर रहे दो दोषियों द्वारा दायर उपचारात्मक (क्यूरेटिव) याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 14 जनवरी को सुनवाई करेगा।

IANS IANS
Updated on: January 11, 2020 14:49 IST
Supreme Court of India (File Photo)- India TV
Image Source : PTI Supreme Court of India (File Photo)

नई दिल्ली: निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में मौत की सजा का सामना कर रहे दो दोषियों द्वारा दायर उपचारात्मक (क्यूरेटिव) याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 14 जनवरी को सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति एन. वी. रमना, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति आर. भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पांच न्यायाधीशों वाली पीठ विनय शर्मा और मुकेश द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। पहले विनय शर्मा ने यह याचिका दायर की थी, जिसके बाद अन्य दोषी मुकेश ने भी उपचारात्मक याचिका दायर की।

यहां मंगलवार को एक निचली अदालत ने निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में चार दोषियों के खिलाफ मौत का वारंट जारी किया था। अदालत ने इस मामले में चार दोषियों को 22 जनवरी की सुबह सात बजे फांसी देने का समय तय किया है। 16 दिसंबर, 2012 को 23 वर्षीय निर्भय के साथ बेहरमी से सामूहिक दुष्कर्म किया गया और दोषियों की ओर से पीड़िता को काफी अत्याचार भी झेलना पड़ा, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद अपराध में शामिल सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर दुष्कर्म व हत्या का मामला दर्ज किया गया।

आरोपियों में से एक नाबालिग था, जोकि एक किशोर (जुवेनाइल) अदालत के सामने पेश किया गया। वहीं एक अन्य आरोपी ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। बाकी बचे चार दोषियों को सितंबर 2013 में एक ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी और मार्च 2014 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा। इसके बाद मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सजा में कोई बदलाव नहीं किया और अदालत ने दोषियों की पुनर्विचार याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।

उपचारात्मक याचिका में विनय शर्मा ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही के कारण उसका पूरा परिवार पीड़ित हुआ है। इसमें कहा गया कि "अकेले याचिकाकर्ता को दंडित नहीं किया जा रहा है, बल्कि आपराधिक कार्यवाही के कारण उसका पूरा परिवार अत्यंत पीड़ित हुआ है। परिवार की कोई गलती नहीं, फिर भी उसे सामाजिक प्रताड़ना और अपमान झेलना पड़ा है।"

वरिष्ठ अधिवक्ता अधिस सी. अग्रवाल और ए.पी. सिंह के जरिए दायर याचिका में कहा गया है, "याचिकाकर्ता के माता-पिता वृद्ध और अत्यंत गरीब हैं। इस मामले में उनका भारी संसाधन बर्बाद हो गया और अब उन्हें कुछ भी हाथ नहीं लगा है।"

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