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कारगिल युद्ध लड़ चुके सेना का पूर्व अधिकारी ‘विदेशी’ घोषित, हिरासत शिविर में भेजा गया

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : May 30, 2019 10:49 am IST,  Updated : May 30, 2019 10:49 am IST

शिविर में जाने से पहले सनाउल्लाह ने वहां इंतजार कर रहे पत्रकारों को बताया कि वह भारतीय नागरिक हैं और उनके पास नागरिकता से संबंधित सारे कागजात हैं।

कारगिल युद्ध लड़ चुके सेना का पूर्व अधिकारी ‘विदेशी’ घोषित, हिरासत शिविर में भेजा गया- India TV Hindi
कारगिल युद्ध लड़ चुके सेना का पूर्व अधिकारी ‘विदेशी’ घोषित, हिरासत शिविर में भेजा गया

रांगिया (असम): असम में राष्ट्रपति पदक से अलंकृत सेना के एक पूर्व अधिकारी को विदेशियों के लिए बने न्यायाधिकरण के द्वारा बुधवार को विदेशी घोषित होने के पश्चात हिरासत शिविर में भेज दिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कामरूप जिले में कार्यरत इस न्यायाधिकरण ने इसी जिले के बोको पुलिस थाना क्षेत्र के गांव कोलोहिकाश के निवासी मोहम्मद सनाउल्लाह को ‘विदेशी’ घोषित कर दिया। वह इस समय सीमा पुलिस में सहायक उप-निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं।

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कामरूप जिले के अपर पुलिस अधीक्षक संजीब सैकिया ने बताया कि 2008 में सनाउल्लाह का नाम मतदाताओं की सूची में ‘डी’ (संदिग्ध) मतदाता के रूप में दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि न्यायाधिकरण के फैसले के बाद पुलिस ने तय प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई करते हुए सनाउल्लाह को गोलपाड़ा के हिरासत शिविर में भेज दिया।

शिविर में जाने से पहले सनाउल्लाह ने वहां इंतजार कर रहे पत्रकारों को बताया कि वह भारतीय नागरिक हैं और उनके पास नागरिकता से संबंधित सारे कागजात हैं। सनाउल्लाह ने बताया कि उन्होंने सेना में शामिल होकर तीस साल (1987-2017) तक इलेक्ट्रोनिक एंड मैकेनिकल इंजीनियर विभाग में सेवाएं दी हैं।

उन्हें 2014 में राष्ट्रपति की तरफ से पदक भी मिल चुका है। वह बीते साल से सीमा पुलिस में बतौर सहायक उपनिरीक्षक के पद पर कार्यरत है। सनाउल्लाह के परिवारवालों ने बताया कि वह न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ गौहाटी उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।

सनाउल्लाह के चचेरे भाई अजमल हक ने बताया, 'सनाउल्लाह ने 1987 में सेना जॉइन किया था। वह जम्मू-कश्मीर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और करगिल युद्ध के समय वहीं पर थे। 2014 में राष्ट्रपति की तरफ से सर्टिफिकेट देकर जूनियर कमिशन्ड ऑफिसर की पोस्ट पर प्रमोशन हुआ था।'

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