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MP: चंबल के 5 फीसदी स्कूलों में ही तंबाकू रोकथाम की कोशिश

 Written By: IANS
 Published : May 16, 2016 05:32 pm IST,  Updated : May 16, 2016 06:04 pm IST

मध्य प्रदेश में 330 से अधिक बच्चे प्रतिदिन तंबाकू सेवन शुरू करते हैं। उनमें से अधिकतर को इसकी लत लग जाती है

Tobacco prevention- India TV Hindi
Tobacco prevention

ग्वालियर: मध्य प्रदेश के शिक्षण संस्थाओं में तम्बाकू या अन्य धूम्रपान उत्पादों के उपयोग की रोकथाम के लिए भले ही कानून बना दिए गए हों, मगर इस राज्य के ग्वालियर-चंबल संभाग के चार जिलों में सिर्फ पांच प्रतिशत शिक्षण संस्थान ही ऐसे हैं, जो इनका पालन करते नजर आते हैं।

यह खुलासा 'वायॅस ऑफ टोबैको विक्टिम्स' (वीओटीवी) ने किया है। वीओटीवी संरक्षक व कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर गौरव अग्रवाल ने बताया कि यदि कम उम्र में ही युवाओं को तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों से बचा लिया जाए, तो बाद में इनको शुरू करने की संभावना कम हो जाती है।

मध्य प्रदेश में 330 से अधिक बच्चे प्रतिदिन तंबाकू सेवन शुरू करते हैं। उनमें से अधिकतर को इसकी लत लग जाती है और उनमें इसको छोड़ने की सभावना पांच प्रतिशत ही होती है। इसलिए बच्चों एवं युवाओं को बचाने के लिए शुरू में ही अहम कदम उठाना बहुत जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बच्चे तंबाकू व धूम्रपान की लत से दूर रहें, इसके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। शिक्षण संस्थानों में सूचना पटल पर तंबाकू निषेध की सूचना दर्ज किए जाने के साथ ही शिक्षण संस्थान के 100 मीटर की दूरी तक इन उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है। इस नियम का उल्लंघन करने वाले पर 200 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।

वीओटीवी के तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान अभियान के डॉक्टर सोमिल रस्तोगी ने बताया कि ग्वालियर-चंबल संभाग के चार जिलों का बुरा हाल है, जहां महज पांच प्रतिशत शिक्षण संस्थानों में ही शिक्षा विभाग के निर्देशों का पालन हो रहा है।

दतिया के 1346 राजकीय विद्यालयों में से 90, गुना के 2373 में से 104, ग्वालियर के 2110 स्कूलों में से 119 और भिंड के 2635 में से 146 शिक्षण संस्थाओं में ही तंबाकू निषेध के निर्देशों का पालन हो रहा है।

इस इलाके में तीन जिले ऐसे हैं जहां स्थिति बेहतर है। अशोक नगर मे 1551 में 1551, मुरैना के 2514 में 2501, श्योपुर के 1220 स्कूलों में से 881 में धूम्रपान रोकने के लिए अहम कदम उठाए गए हैं। इसी तरह शिवपुरी के 3107 स्कूलों में से 826 में विभागीय निर्देशों का पालन हो रहा है।

उन्होंने बताया कि संचालनालय लोक शिक्षण ने वर्ष 2015 के मई में सिगरेट एवं अन्य तंबाकू नियंत्रण (कोटपा) अधिनियम 2003 के तहत स्कूलों के अंदर व बाहर धूम्रपान निषेध के सूचना पटल लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन कई जिलों के स्कूलों ने अभी तक अपने परिसर के भीतर व बाहर तंबाकू व धूम्रपान निषेध के लिए किसी प्रकार की सूचना अंकित नहीं की है।

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