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सुषमा स्वराज की शोक सभा में बोले PM मोदी, कहा- उम्र में मुझसे छोटी थीं लेकिन बहुत कुछ सिखाया

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Aug 13, 2019 07:15 pm IST,  Updated : Aug 13, 2019 11:39 pm IST

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की याद में आयोजित शोक सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी और सुषमा स्वराज की कुछ यादों का जिक्र किया।

PM Modi address condolence meeting for Sushma Swaraj- India TV Hindi
PM Modi address condolence meeting for Sushma Swaraj Image Source : TWITTER

नई दिल्ली: दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की याद में आयोजित शोक सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी और सुषमा स्वराज की कुछ यादों का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि सुषमा स्वराज उम्र में उनसे छोटी थीं लेकिन उन्होंने उन्हें बहुत कुछ सिखाया हैं। उन्होंने कहा कि “सुषमा जी के व्यक्तित्व के अनेक पहलू थे, जीवन के अनेक पड़ाव थे और भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में एक अनन्य निकट साथी के रूप में काम करते हुए, असंख्य घटनाओं के हम जीवंत साक्षी रहे हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “एक व्यवस्था के अंतर्गत जो भी काम मिले, उसे जी जान से करना और व्यक्तिगत जीवन में बड़ी ऊंचाई मिलने के बाद भी करना, ये कार्यकर्ताओं के लिए सुषमा जी की बहुत बड़ी प्रेरणा है।” उन्होंने कहा कि “सुषमा जी का भाषण प्रभावी होने के साथ-साथ, प्रेरक भी होता था। सुषमा जी के वक्तव्य में विचारों की गहराई हर कोई अनुभव करता था, तो अनुभव की ऊंचाई भी हर पल नए मानक पार करती थी। ये दोनों होना एक साधना के बाद ही हो सकता है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “सुषमा जी की जुबान में कभी-कभी पक्का हरियाणवी टच रहता था, बात को फटाक से कहना और उससे टस से मस न होना, उनकी विषेशता थी। जरूरत पड़ने पर कठोरतापूर्वक चीज को रखना, गलत निर्णय से पार्टी और साथियों को बचाने की जिम्मेदारी को निभाने के लिए कभी हरियाणवी भाषा का उपयोग करना पड़े तो उससे पीछे नहीं हटती थीं।”

एक घटना का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “इस बार जब सुषमाजी ने लोकसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया, वैसा ही फैसला उन्होंने पहले भी किया था। वे अपने विचारों में बड़ी पक्की रहती थीं। मैं और वेंकैया जी उनके पास गए और उन्हें कर्नाटक से चुनाव लड़ने के लिए मनाया, उस चुनाव का परिणाम निश्चित था, लेकिन उन्हें चुनौतियों का सामना करना पसंद था।” उन्होंने कहा कि “वसुधैव कुटुंबकम को विदेश मंत्रालय कैसे सिद्ध कर सकता है, उन्होंने विश्वभर में फैले भारतीय समुदाय के लोगों के माध्यम से ये करके दिखाया।”

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