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सामूहिक प्रयासों से हो आतंकवाद का खात्मा: प्रणब

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jun 13, 2016 05:37 pm IST,  Updated : Jun 13, 2016 05:37 pm IST

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आतंकवाद के खतरे का सामना कर रहे घाना के प्रति भारत के सहयोग का संकल्प जताते हुए कहा कि आतंकवाद एक ऐसा दंश है जो सीमाएं नहीं जानता।

Pranab Mukherjee
- India TV Hindi
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अकरा: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आतंकवाद के खतरे का सामना कर रहे घाना के प्रति भारत के सहयोग का संकल्प जताते हुए कहा कि आतंकवाद एक ऐसा दंश है जो सीमाएं नहीं जानता और सभ्य दुनिया के सामूहिक प्रयासों से इसका खात्मा किया जाना चाहिए। दो दिवसीय दौरे पर यहां आए मुखर्जी ने कहा कि भारत तीन दशकों से आतंकवाद का पीड़ित रहा है और घाना की यह चिंता साझा करता है कि आतंकवाद वैश्विक खतरा बन गया है। किसी भारतीय राष्ट्रपति की यह पहली घाना यात्रा है।

घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रैमानी महामा द्वारा रविवार को आयोजित भोज को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा यह एक दंश है और यह किसी खास देश की सीमा तक सीमित नहीं है। इसकी कोई विचारधारा नहीं है सिवाय भयावह विनाश की विचारधारा के। इसे सभ्य दुनिया के सामूहिक प्रयासों से खत्म किया जाना चाहिए। भारत आपके साथ एकजुटता दर्शाता है क्योंकि आप इस चुनौती का सामना कर रहे हैं। मुखर्जी की यह यात्रा अफ्रीका के साथ अपने संबंध सुदृढ़ करने की भारत की कोशिश के तहत है। महामा ने महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए घाना के पहले राष्ट्रपति क्वामे क्रुमाह और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिश्तों को याद किया। निर्गुट आंदोलन की स्थापना में क्रुमाह और नेहरू दोनों की ही अहम भूमिका थी। मुखर्जी ने अपने संबोधन में रवीन्द्रनाथ टैगोर की अफ्रीका शीर्षक की कविता को भी उद्धृत किया।

मुखर्जी ने कहा आज वैश्विक व्यवस्था को ऐसे वैश्विक प्रशासनिक ढांचे की दरकार है जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मौजूद नई चुनौतियों को समझ कर उनसे निपट सके। भारत में हर छठा नागरिक दुनिया के किसी अन्य देश और अफ्रीका का है और भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक उर्जावान केंद्र है फिर भी यह गंभीर विसंगति है कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से बाहर ही है। घाना में भारतीय कंपनियों के निवेश में वृद्धि के बारे में राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय कारोबारी समूह संभावनाओं को समझता है और अगर उन्हें समुचित अवसर दिए जाएं तो यह समूह निवेश कर प्रसन्न होगा। उन्होंने कहा भारत के लोग घाना के महान पुत्र और अफ्रीका को एकजुट रखने के लिए बुद्धिजीवी आंदोलन के दूरदृष्टि वाले नेता डॉ क्वामे क्रुमाह को बहुत प्यार से याद करते हैं। उन्होंने अफ्रीका को गौरवान्वित किया और लोगों को तथा अफ्रीकी देशों की सरकारों को वैश्विक मामलों में अपने सही स्थान के लिए दावा करने की खातिर प्रेरित किया।

मुखर्जी के सम्मान में आयोजित शानदार भोज समारोह में न केवल परंपरागत अफ्रीकी व्यंजन परोसे गए थे बल्कि पृष्ठभूमि में हिंदी फिल्मों के गीतों की धुन भी बज रही थीं। यह भोज समारोह फ्लैग स्टाफ कॉलेज में आयोजित किया गया था जिसका निर्माण एक प्रख्यात भारतीय बिल्डर ने किया है। मुखर्जी ने महामा को भारत के पहले राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद का एक पोर्ट्रेट भेंट किया और जोर दे कर कहा कि भारत पिछले साल नयी दिल्ली में संपन्न भारत-अफ्रीकी फोरम सम्मेलन के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए घाना का सतत सहयोग चाहता है। गरीबी का स्तर घटा कर लगभग आधा करने और अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए घाना द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए मुखर्जी ने कहा कि यह देश समृद्धि के रास्ते पर बढ़ रहा है और इस राह पर सहयोग के लिए भारत हमेशा अपना हाथ आगे बढ़ाएगा।

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