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राष्ट्रपति तीन देशों के छह दिवसीय दौरे पर रवाना

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jun 12, 2016 04:54 pm IST,  Updated : Jun 12, 2016 04:54 pm IST

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी रविवार को तीन अफ्रीकी देशों घाना, आइवरी कोस्ट और नामीबिया के छह दिवसीय दौरे पर रवाना हो गए।

Pranab Mukherjee- India TV Hindi
Pranab Mukherjee

दिल्ली: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी रविवार को तीन अफ्रीकी देशों घाना, आइवरी कोस्ट और नामीबिया के छह दिवसीय दौरे पर रवाना हो गए। इन देशों को ऐसी मजबूत राजनीतिक व्यवस्था के तौर पर जाना जाता है जहां लोकतंत्र की जड़े गहरी हैं और इन देशों की यात्रा का उद्देश्य इनके साथ व्यापार संबंधों को और अधिक पुख्ता बनाना है।

किसी भारतीय राष्ट्रपति की घाना और आइवरी कोस्ट की यह पहली यात्रा है जबकि नामीबिया में किसी राष्ट्रपति की यात्रा दो दशक बाद हो रही है। मुखर्जी हालांकि अफ्रीकी महाद्वीप के कई देशों में गए हैं लेकिन अपने लंबे राजनीतिक करियर में वह पहली बार इन देशों के दौरे पर जा रहे हैं। राष्ट्रपति भवन में मुखर्जी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग और सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग सहित अन्य हस्तियों ने परंपरागत तरीके से रवाना किया।

सचिव (ईआर) अमर सिन्हा ने बताया इन देशों को हम मजबूत राजनीतिक व्यवस्था के संदर्भ में अच्छे देशों के तौर पर देखते हैं जहां लोकतंत्र की गहरी जड़ें हैं और अपने क्षेत्रों में यह अच्छा कर रहे हैं। राष्ट्रपति के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह और सांसद एस एस अहलूवालिया तथा मनसुख लाल मंडाविया गए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री सिंह ने कहा राष्ट्रपति का यह अत्यंत महत्वपूर्ण दौरा है। वह आईवरी कोस्ट और घाना पहली बार जा रहे हैं। जबकि नामीबिया की उनकी यात्रा किसी राष्ट्रपति की 21 साल बाद हो रही यात्रा है। उनका व्यस्त कार्यक्रम है। उन्होंने कहा यह केवल प्रतीकात्मक यात्रा नहीं है बल्कि इसमें शिक्षा, आर्थिक और सामुदायिक तत्व शामिल हैं।

राष्ट्रपति का पहला पड़ाव घाना की राजधानी अकरा में होगा जहां फ्लैग स्टाफ हाउस कहलाने वाले राष्ट्रपति भवन में सोमवार को प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी। फ्लैग हाउस स्टाफ का निर्माण प्रख्यात भारतीय बिल्डर शपूरजी पलोनजी ने किया था। बातचीत के दौरान वीजा छूट के संबंध में कुछ समझौतों पर तथा लाइन ऑफ क्रेडिट्स पर चर्चा हो सकती है। अकरा में मुखर्जी घाना के पहले राष्ट्रपति वाने कु्रमाह की समाधि पर जा कर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। वह आईसीसीआर द्वारा भेंट की गई महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे और एक पौधा लगाएंगे। सिन्हा ने कहा घाना में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करीब तीन अरब डालर का है।

अनिवासी भारतीय, पेशवरों ने आईटी, फार्मास्युटिकल और अन्य क्षेत्रों में निवेश किया है। अगर आप पिछले तीन दशक के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि हमारे व्यापार में तीन गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा घाना का मुख्य व्यापार सोने का निर्यात है जो वहां के कारोबार में 80 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है। घाना के सोने की भारत में भारी मांग है। राष्ट्रपति आईसीटी में इंडिया घाना कोफी अन्नान सेंटर ऑफ एक्सीलेन्स भी जाएंगे और वहां के फैकल्टी सदस्यों तथा छात्रों से मुलाकात करेंगे। इस सेंटर की स्थापना भारत ने की थी।

अपने दौरे के दूसरे चरण में राष्ट्रपति आईवरी कोस्ट जाएंगे जहां बीते दशक में अस्थिरता का दौर रहा है। सिन्हा ने कहा वर्ष 2011 में, एक नई सरकार आई और राष्ट्रीय स्तर पर सुलह सहमति हुई। वहां हवाईअड्डे पर मुखर्जी की अगवानी राष्ट्रपति अलासाने औत्तारा करेंगे। राष्ट्रपति को वहां आबिदजान शहर की चाभी प्रतीकात्मक तौर पर सौंपी जाएगी और उन्हें देश के सर्वोच्च पुरस्कार से भी नवाजा जा सकता है।

सिन्हा ने बताया एग्जिम बैंक अपना कार्यालय फिर से खोलने जा रहा है। गृह युद्ध के दौरान इसे डकार ले जाया गया था इसलिए अब उन्हें फिर से अनुमति मिल गई है और वह फिर से आइवरी कोस्ट आ रहे हैं। यह पश्चिम अफ्रीका में उनका क्षेत्रीय कार्यालय होगा जहां से हमारी सभी लाइन्स ऑफ क्रेडिट की निगरानी की जाएगी। काजू का सबसे बड़ा उत्पादक देश आईवरी कोस्ट भारत में इसका सबसे बड़ा निर्यातक भी है। मुखर्जी का अंतिम पड़ाव होगी नामीबिया की राजधानी विंडहॉक जहां मुखर्जी वहां के राष्ट्रपति सैम नुजोमा से मिलेंगे।

नामीबिया की अर्थव्यवस्था खनिज एवं खनन पर आधारित है और भारत माइनिंग इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग के लिए पेशकश कर सकता है। सिन्हा ने बताया खनन क्षेत्र जीडीपी में 10 से 11 फीसदी का योगदान देता है। लेकिन इससे होने वाली विदेशी आय का योगदान करीब 50 फीसदी होता है इसलिए उनकी इस पर निर्भरता बहुत है। यह एक छोटा देश है जिसकी आबादी करीब 25 से 30 लाख है। नामीबिया के रक्षा बलों को प्रशिक्षण देने तथा सूचना प्रौद्योगिकी में सेंटर ऑफ एक्सीलेन्स की स्थापना के लिए भारतीय सेना की तैनाती पर भारत चार सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर कर सकता है।

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