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रादज प्रमुख लालू यादव चारा घोटाले में CBI अदालत में पेश हुए

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jun 13, 2016 05:29 pm IST,  Updated : Jun 13, 2016 05:29 pm IST

चारा घोटाले में दुमका कोषागार से फर्जी ढंग से तीन करोड़ 31 लाख रुपए निकालने के एक मामले में सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की यहां सीबीआई के न्यायाधीश शिवपाल सिंह की विशेष अदालत में पेशी हुई।

Lalu Prasad Yadav
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रांची: चारा घोटाले में दुमका कोषागार से फर्जी ढंग से तीन करोड़ 31 लाख रुपए निकालने के एक मामले में सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की यहां सीबीआई के न्यायाधीश शिवपाल सिंह की विशेष अदालत में पेशी हुई। नब्बे के दशक में बिहार में लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री काल में हुए लगभग साढ़े नौ सौ करोड़ रुपए के चारा घोटाले में दुमका कोषागार से तीन करोड़ 31 लाख रुपए फर्जी ढंग से निकालने से जुड़े  आरसी-38ए-96 के एक मामले में राजद प्रमुख लालू को सोमवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत में पेश होना पड़ा।

विशेष अदालत में लालू यादव के अलावा पूर्व सांसद आर के राणा और जगदीश शर्मा की भी सोमवार को पेशी हुई है। उल्लेखनीय है कि इस मामले का खुलासा वर्ष 1996 में हुआ। इसमें लालू यादव के अलावा कुल 47 आरोपी थे, लेकिन लंबे समय से चल रही अदालती कार्यवाही के दौरान 15 आरोपियों की मौत हो चुकी है। सीबीआई ने दो आरोपियों को सरकारी गवाह बना लिया है, जबकि इसी मामले में एक अन्य आरोपी को झारखंड उच्च न्यायालय से राहत मिल चुकी है। कुल मिलाकर अब दुमका कोषागार से जुड़े इस मामले में केवल 29 आरोपी बचे हैं, जिनमें कुछ पूर्व आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं।

पिछली अनेक तारीखों से अनेक आरोपियों के इस मामले में अदालत के सामने पेश नहीं होने का संज्ञान लेते हुए अदालत ने सभी की सोमवार को पेशी का आदेश दिया था। राजद प्रमुख लालू यादव अपने दलबल के साथ सबेरे करीब साढ़े सात बजे अदालत में पेशी के लिए हाजिर हुए। लालू यादव के खिलाफ इस समय रांची की विशेष अदालतों में चारा घोटाले से जुड़े चार मामले चल रहे हैं, जबकि इससे पहले चारा घोटाले से ही जुड़े आरसी 20ए-96 मामले में लालू यादव को वर्ष 2013 में 30 सितंबर को सीबीआई की प्रवास कुमार सिंह की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था और न्यायिक हिरासत में यहां बिरसामुंडा जेल भेज दिया था। इसके बाद उसी साल 13 दिसंबर को सर्वोच्च न्यायालय से उन्हें जमानत दे दी। जमानत मिलने के लगभग ढाई माह बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था। चारा घोटाले के इसी मामले में दोषी करार दिए जाने और चार वर्ष के कैद की सजा सुनाए जाने के बाद लालू के राजनीतिक जीवन पर ग्रहण लग गया था और उनकी सांसदी छिन गई थी।

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