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Rafale Update: UAE से भारत के लिए रवाना हुए राफेल विमान, अंबाला एयरबेस पर वाटर कैनन से होगा भव्य स्वागत

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Jul 29, 2020 12:53 pm IST,  Updated : Jul 29, 2020 12:53 pm IST

भारतीय वायुसेना का अपने ब्रह्मास्त्र राफेल लड़ाकू विमानों का इंतजार कुछ ही घंटों में खत्म होने वाला है।

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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना का अपने ब्रह्मास्त्र राफेल लड़ाकू विमानों का इंतजार कुछ ही घंटों में खत्म होने वाला है। राफेल विमानों की पहली खेप अब कुछ ही घंटों के भीतर अंबाला एयरबेस पहुंचने वाली है। फ्रांस से चले 5 राफेल विमान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अल दफ्रा एयरबेस से भारत रवाना हो चुके हैं। राफेल को उड़ाकर लाने वाले पायलट्स ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह की अगुवाई में ये विमान दोपहर बाद अंबाला एयरबेस पहुंच जाएंगे। इस मौके पर वाटर कैनन के साथ एयरफोर्स चीफ युद्धक विमानों को रिसीव करेंगे। एयरफोर्स चीफ भदौरिया ने 2016 में 60 हजार करोड़ रुपये के देश के सबसे बड़े रक्षा सौदे के हिस्से के रूप में शामिल किया जा रहा है।

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अधिकारियों ने कहा कि पांच राफेल विमान सोमवार की शाम को करीब सात घंटों की उड़ान के बाद संयुक्त अरब अमीरात के अल दाफरा हवाईअड्डे पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि फ्रांस से भारत आ रहे इन लड़ाकू विमानों के लिये यही एक स्टॉपेज था। राफेल विमान उस गोल्डन एरोज स्क्वॉड्रन का हिस्सा होगा जिसकी कमान 1999 कारगिल युद्ध के दौरान पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने संभाली थी।

राफेल की आगवनी को लेकर अंबाला जिला प्रशासन ने अंबाला एयर फोर्स स्टेशन के आसपास के इलाके में धारा 144 लगा दी है। वहां आसपास किसी भी तरह की फोटोग्राफी वीडियोग्राफी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही वहां 4 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर भी मनाही है। बुधवार (29 जुलाई)  को भारत आने वाले राफेल विमानों को लेकर यह फैसला लिया गया है।

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Image Source : FILERafale

फ्रांस से भारत आ रहे पांच राफेल लड़ाकू विमानों में एक फ्रांसीसी टैंकर ने 30 हजार फुट की ऊंचाई पर बीच हवा में ही ईंधन भरा। फ्रांस में भारतीय दूतावास द्वारा मंगलवार को जारी तस्वीरों में यह जानकारी दी गई।  भारतीय वायुसेना ने ट्वीट किया, “भारतीय वायुसेना हमारे राफेल विमानों की घर वापसी की यात्रा में फ्रांसीसी वायुसेना द्वारा उपलब्ध कराए गए सहयोग के लिये उनकी सराहना करती है।” 

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भारत को यह लड़ाकू विमान ऐसे समय में मिल रहे हैं, जब उसका पूर्वी लद्दाख में सीमा के मुद्दे पर चीन के साथ गतिरोध चल रहा है। भारतीय वायुसेना पहले ही वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे अपने अहम हवाई ठिकानों पर अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को तैनात कर चुकी है। 

भारत ने वायुसेना के लिये 36 राफेल विमान खरीदने के लिये 23 सितंबर 2016 को फ्रांस की विमानन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डसो एविएशन के साथ 59 हजार करोड़ रुपये का करार किया था। वायुसेना को पहला राफेल विमान पिछले साल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की फ्रांस यात्रा के दौरान सौंपा गया था। राफेल विमानों की पहली स्क्वाड्रन को अंबाला वायुसैनिक अड्डे पर तैनात किया जाएगा। 

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Image Source : INDIA TVRafale

क्यों अंबाला में ही तैनात किया जा रहा है राफेल? 

आखिर वायुसेना ने क्यों पहले 5 राफेल विमानों को अंबाला एयरबेस में तैनात करने की योजना बनाई है? इस सवाल का जवाब भारत के सामने रक्षा चुनौतियां और उन चुनौतियों से निपटने में अंबाला के महत्व से मिल जाता है। मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर में भारत और पाकिस्तान के बॉर्डर (LoC) तथा लद्दाख में भारत और चीन बॉर्डर पर मुख्य चुनौती है। अंबाला से यह दोनो जगह काफी नजदीक हैं। LaC के उस पार चीन का जो नजदीकी एयरबेस उसकी अंबाला से लगभग 300 किलोमीटर दूरी है जबकि अंबाला के पास पाकिस्तान के नजदीकी एयरबेस की दूरी लगभग 200 किलोमीटर है। जरूरत पड़ने पर राफेल विमान मिनटों में इन दोनो एयरबेस को अपना निशाना बना सकता है। चीन और पाकिस्तान के पास इस समय जो एडवांस लड़ाकू विमान हैं उनके मुकाबले राफेल काफी एडवांस है। पाकिस्तान के पास फिलहाल F-16 विमान सबसे एडवांस है और उसे पिछले साल फरवरी में भारतीय पायलट अभिनंदन ने मिग वायसन से ही गिरा दिया था। चीन के पास सबसे एडवांस J-20 लड़ाकू विमान है, चीन इसे दुनिया का सबसे एडवांस लड़ाकू विमान बताता है। लेकिन चीन के इस विमान के साथ दिक्कत ये है कि इसे दुनियाभर में किसी भी लड़ाई में टेस्ट नहीं किया गया है। जबकि दूसरी ओर राफेल को दुनियाभर में कई लड़ाइयों में आजमाया जा चुका है। 

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