नई दिल्ली: गुजरात में दलित समुदाय के कुछ लोगों की पिटाई की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक है कि आजादी के इतने वर्ष बाद भी दलितों पर अत्याचार की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने इसे सामाजिक बुराई करार देते हुए इसे समाप्त करने के लिए सभी से मिलकर काम करने का आग्रह किया।
राजनाथ ने देश के विभिन्न हिस्सों में दलितों के खिलाफ अत्याचार के मुद्दे पर राज्यसभा में हुई अल्पकालिक चर्चा के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि गुजरात के इस मामले में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और आईपीसी एवं अन्य कानून की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और त्वरित जांच की पहल की जा रही है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर गृह मंत्री के जवाब से असंतोष जताते हुए सदन से वाकआउट किया। इसे पहले राजनाथ ने कहा कि इस मामले को सीआईडी को सौंपा गया है जो 60 दिनों में अपनी जांच पूरी करके आरोपपत्र दायर कर देगी। उन्होंने कहा कि इस मामले को सीबीआई को सौंपे जाने की मांग की जा रही है लेकिन सीबीआई को मामला सौंपे जाने पर जांच में विलंब हो सकता है।
गृह मंत्री ने कहा कि इस मामले में एक निरीक्षक सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। उन्होंने कहा कि इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ जल्द जांच पूरी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि गुजरात की घटना की शीघ्र सुनवाई के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष अदालत गठित करने के मकसद से उच्च न्यायालय से अनुरोध किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि देश में दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में दोषसिद्धि का प्रतिशत बहुत कम है। उन्होंने कहा कि इसके लिए अधिक विशेष अदालतें गठित करने की जरूरत है।