नयी दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन को पद से हटाने की मांग की है। स्वामी रघुराम राजन की आर्थिक नीतियों के कटु आलोचक हैं और वे बीते सप्ताह कह चुके हैं स्वामी ने ब्याज दर बढ़ा कर उद्योगों की रफ्तार धीमी कर दी और देश में बेरोजगारी को बढ़ाया, इसलिए उन्हें पद से हटा कर वापस शिकागो भेज देना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी को भेजे पत्र में सुब्रह्मण्यम स्वामी ने लिखा है, "मैं डॉ राजन द्वारा जानबूझकर और सोचसमझकर भारतीय अर्थव्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर देने के किए जा रहे प्रयासों से स्तब्ध हूं..." बीजेपी सांसद का आरोप है कि डॉ राजन 'भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारने वाले व्यक्ति की तरह काम कर रहे हैं, किसी ऐसे शख्स की तरह नहीं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की बेहतरी चाहता हो...'
उन्होंने यह भी कहा, चूंकि डॉ रघुराम राजन इस देश (भारत) में ग्रीन कार्ड के साथ रह रहे हैं, सो वह 'मानसिक रूप से पूरी तरह भारतीय नहीं हैं...'
उधर, वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कल ही राजन को दूसरा कार्यकाल देने या नहीं देने के सवाल पर बयान दिया कि यह ऐसा विषय नहीं है, जिस पर सार्वजनिक रूप से चर्चा की जाये।
वहीं, ब्रिटेन के दौर पर राजन ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि उनके आसपास पहले से ही काफी बारूद है और वे इसमें और इजाफा नहीं चाहते हैं। राजन ने यह भी कहा था कि पहले से जो बारूद उनके इर्द-गिर्द हैं, उससे उन्हें पहले निबटना है। राजन औद्योगिक मोर्चे पर बेबाक टिप्पणी करने व कड़े फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। वे सरकार की नीतियों में भी बारीक खामियों को उजागर कर चेताते रहते हैं।
उन्हें कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान आरबीआई गवर्नर के रूप में नियुक्त किया गया था, और जब वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी की सरकार सत्ता में आई, उनके पद को खतरे में माना जाने लगा था, लेकिन रघुराम राजन ने कहा था कि रिज़र्व बैंक तथा सरकार के बीच 'सम्मानजनक रिश्ता' स्थापित है।
पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से आरबीआई गवर्नर की प्रशंसा की थी कि उन्होंने जटिल आर्थिक मुद्दों को भी लगातार मुलाकातों में उन्हें 'बिल्कुल सटीक' तरीके से समझा दिया।