1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. ट्रिपल तलाक़: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई ख़त्म, अब फैसले का इंतज़ार

ट्रिपल तलाक़: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई ख़त्म, अब फैसले का इंतज़ार

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 18, 2017 04:21 pm IST,  Updated : May 18, 2017 04:22 pm IST

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज गुरुवार को ख़त्म हो गई और सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। ट्रिपल तलाक़ पर 11 मई से सुनवाई शुरु हुई थी

Triple Talaq- India TV Hindi
Triple Talaq

नई दिल्ली: तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज गुरुवार को ख़त्म हो गई और सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। ट्रिपल तलाक़ पर 11 मई से सुनवाई शुरु हुई थी और कोर्ट ने कहा था कि छह दिन की सुनवाई के बाद कोर्ट फ़ैसला सुनाएगी।

मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनी। इससे पहले बुधवार को संवैधानिक पीठ ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से पूछा कि क्या औरतें तीन तलाक को ना कह सकती हैं? पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील सिब्बल से चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने पूछा कि क्या महिलाओं को निकाहनामा के समय तीन तलाक को ना कहने का विकल्प दिया जा सकता है। क्या सभी काजियों से निकाह के समय इस शर्त को शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया जा सकता है?

मुस्लिम समुदाय छोटी सी चिड़िया जिस पर गिद्धों की नज़रें-सिब्बल

कपिल सिब्बल ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के एक छोटी सी चिड़िया है, जिस पर गिद्ध अपनी नज़रें गड़ाये बैठा हुआ है। समुदाय के घोंसले को सुप्रीम कोर्ट का संरक्षण मिलना चाहिए। मुस्लिम समुदाय एक विश्वास के साथ कोर्ट आया है और अपने पर्सनल लॉ, परंपरा और रुढ़ियों के लिए सुरक्षा मांग रहा है। मुस्लिम समुदाय का सुप्रीम कोर्ट पर पिछले 67 वर्षों से विश्वास है। उन्होंने कहा कि यदि कोई अदालत इस विश्वास के साथ आता है कि उसे न्यायालय मिलेगा तो अदालत को भी उसकी भावना को समझना चाहिए। अगर यदि अदालत में कोई तीन तलाक़ को रद्द् कराने के लिए आता तो वो ठीक था। लेकिन अदालत का ख़ुद संज्ञान लेना ठीक नहीं है क्योंकि संविधान भी इस विषय पर मौन ही रहा है।

मुस्लिम समाज कठोर रुख अपना सकता है- सिब्बल 

कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेगा तो मुस्लिम समाज कठोर रुख अपना सकता है। मुस्लिम समाज धीरे धीरे तीन तलाक और बहुविवाह को छोड़ रहा है। लिहाज़ा अदालत को स्वत: संज्ञान लेने से बचना चाहिए था। लेकिन अदालत और सरकार के रुख से ये मामला फिर ज़िंदा हो सकता है।

तीन तलाक़ इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं-केंद्र

केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि तीन तलाक इस्लाम का अभिन्न हिस्सा कभी था ही नहीं। इसे सिर्फ इस लिए नहीं जारी रखा जा सकता है कि ये प्रथा पिछले 1400 साल से चल रही थी। अटॉर्नी जनरल ने तर्क देते हुए कहा कि क्या कोई ये कह सकता है कि परंपरा के नाम पर नरबलि को इजाजत दे दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दारुल उलूम देवबंद ने नया फतवा जारी कर कहा कि कोई भी शौहर अपनी पत्नी को उसकी मर्जी के बगैर तलाक नहीं दे सकता है।

जजों ने पूछा कि कहा है क़ुरान में तीन तलाक़ ?

तीन तलाक पर बुधवार को सुनवाइ के दौरान एक ऐसा वक्त आया जब संविधान पीठ के पांचों जज कुरान खोलकर उसकी आयतें पढ़ने लगे। मसला तलाक से जुड़ी कुरान की अल- बकरा चैप्टर दो की आयत संख्या 230 का था। जमीयत उल उलेमा हिंद के वकील वी गिरि ने जब कोर्ट का ध्यान कुरान की आयत संख्या 230 पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि एक बार में तीन तलाक यानी तलाक उल बिद्दत की बात कही गई है। तो मुख्य न्यायधीश समेत पांचों न्यायधीशों ने सामने रखी कुरान उठाई और आयत पढ़ना शुरू किया। कुरान को वह अंग्रेजी अनुवाद था। न्यायधीशों ने वकील वी गिरी से कहा कि जो बात आप कह रहे हैं वो तो इस आयत में नहीं लिखी गई है। सबसे बड़ी बात है कि आयत में लिखी बातों की आप जिस तरह से व्याख्या कर रहे हैं उसका वो मतलब नहीं निकलता है, जिस तरह से आप व्याख्या कर रहे हैं। न्यायधीशों ने कहा कि आप संपूर्णता में देखें, कहीं भी एक बार में तीन तलाक की बात नहीं कही गई है।

'जब हर शुक्रवार कहा जाता है तलाक उल बिद्दत बुरा है'

सुनवाई के दौरान एक साथ तीन तलाक को तलाक उल बिद्दत न मानने और उसे इस्लाम का अभिन्न हिस्सा बता रहे वकील अजमल ख़ान को चीफ जस्टिस ने किताब लेट ग ट्रूथ प्रिवेल दिखाते हुए कहा कि इस किताब में लिखा है कि प्रत्येक शुक्रवार को नमाज के बाद कहा जाता है कि बिद्दत बहुत बड़ा पाप है। तलाक उल बिद्दत पाप है। जब वकील ने कहा कि तीन तलाक को मान्यता है उसे बिद्दत नहीं कहा जाएगा। इस पर मुख्य न्यायधीश ने कहा कि वकील वी गिरी ने अभी कहा है कि तलाक उल बिद्दत कुरान में नहीं है। लेकिन जब वकील उसे बिद्दत न मानने पर अड़ा रहा तो मुख्य न्यायधीश और जस्टिस रोहिंग्टन ने कहा कि ये सुन्नत नहीं है। 

 
कब शुरू हुई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में 11 मई को तीन तलाक पर ऐतिहासिक सुनवाई शुरू हुई। पांच जजों वाली संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई कर रहा है जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायधीश जस्टिस जे एस खेहर कर रहे हैं। इस पीठ में जस्टिस कुरियन जोसफ, आरएफ नरीमन, यूयू ललित और अब्दुल नजीर शामिल हैं। आइए आपको बताते हैं कि तीन तलाक पर जारी सुनवाई में कितने पक्ष शामिल हैं। 

याचिकाकर्ता

-मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधि समूह-इस ग्रुप ने तीन तलाक पर प्रतिबंध को लेकर याचिका दायर की है। और ये बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं के मत का प्रतिनिधित्व कर रहा है।

-कुरआन सुन्नत सोसाइटी: कुरआन के सही ढंग से पालन के लिए बनाया गया समूह, इनकी मांग है कि कुरान का ईमानदार और सही ढंग से क्रियान्वयन हो।

-शायरा बानो: 15 साल शादी के बाद अक्टूबर 2016 में तीन तलाक की शिकार-शायरा बानो को 15 साल की शादी के बाद उनके पति ने तलाक दे दिया। शायरा बानो इसे कोर्ट में सेकर चली गईं। उन्होंने तीन तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला की परंपरा को चुनौती दी।
-आफरीन रहमान: मई 2016 में खत के जरिए मिला तलाक
-गुलशन परवीन: पिछले साल 10 रुपये के स्टैंप पर मिला तलाक-रामपुर की रहने वाली 30 वर्षीय गुलशन परवीन अंग्रेजी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएट को उनके पति ने तलाक दे दिया । 2013 में उनकी शादी हुई थी। को
-इशरत जहां: 15 साल की शादीशुदा, दुबई से फोन पर मिला तलाक। फिलहाल वो पश्चिम बंगाल में रह रहीं हैं।
-अतिया शाबरी: अमरोहा की रहने वाली उसके पति ने स्पीड पोस्ट से मिला तलाक। इस संबंध में इशरत ने पीएम और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत