हैदराबाद: AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज हुआ है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने हैदराबाद में आईएसआईएस से सहानुभूति रखने वाले जिन संदिग्धों को पकड़ा था, उन्हें ओवैसी ने कानूनी मदद देने की बात की थी। मामला कोर्ट तक पहुंचा और कोर्ट ने पुलिस को राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया।
ओवैसी जब-जब बोलते हैं तो कोई न कोई विवाद खड़ा हो जाता है। उनके खिलाफ भड़काऊ भाषण देने की शिकायतें सामने आ जाती हैं। हैदराबाद के यही भड़काऊ भाईजान एक बार फिर से राजद्रोह के केस में फंस गए हैं। करीब दो हफ्ते पहले हैदराबाद की मक्का मस्जिद में दिया भाषण AIMIM के चीफ असद्दुदीन ओवैसी के गले पड़ गया है। वो भाषण जिसमें उन्होंने हैदराबाद में पकड़े गए ISIS के पांच सिंपैथाइरजर्स को खुलेआम कानूनी मदद देने की बात कही थी।
ओवैसी ने शुक्रवार 1 जुलाई को हैदराबाद की मशहूर मक्का मस्जिद में ये भाषण दिया था और इसके दो दिन बाद ही 3 जुलाई को एक वकील ने हैदराबाद के सरूर नगर थाने में ओवैसी के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। लेकिन जब दस दिन तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो 13 जुलाई को हैदराबाद के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट में शिकायत दर्ज जिसके बाद कोर्ट ने ओवैसी के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज करने का आदेश दिया और केस दर्ज भी हो गया। कोर्ट ने हैदराबाद पुलिस को इस मामले में 30 जुलाई तक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
याचिका देने वाले वकील के करुणा सागर का कहना है कि ओवैसी ने एक सांसद के तौर पर देश की संप्रभुता की रक्षा करने की शपथ ली है। ऐसे में वो ISIS से सहानुभूति रखने वालों की कानूनी मदद का एलान कैसे कर सकते हैं। हालांकि ओवैसी का कहना है कि मुसलमानों को बदनाम करने के लिए आईएसआईएस का हौव्वा खड़ा किया जा रहा है। अपने खिलाफ शिकायत दर्ज होने के बाद ओवैसी ने सुरक्षा एजेंसियों को कैसे आगाह किया था।
आईएसआईएस से सहानुभूति रखने वालों को कानूनी पैरवी के मामले में बात आगे बढ़ गई है। अब हैदराबाद पुलिस को उनके भाषण की तफसील से छानबीन करके कोर्ट को बताना है। उसके बाद ही कोर्ट तय करेगी कि ओवैसी के खिलाफ राजद्रोह के आरोप में कितना दम है।
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