
बेटी बचाओ के मोर्चे पर भी सराहनीय सफलता
वो खामियां जिनसे बिगड़ती है हरियाणा की छवि, उनमें कोख में कत्ल यानि लिंगानुपात में कमी सबसे बड़ी खामी है। शायद यही वजह थी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत हरियाणा के पानीपत से ही की थी। हरियाणा के कई जिले ऐसे हैं जिनका लिंगानुपात बेहद शर्मनाक है। शरणदीप कौर बराड़ ने प्रधानमंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को भी बेहद प्राथमिकता पर लिया और जिसका परिणाम यह है कि आज (अक्तूबर 2016 तक) सिरसा जिले का लिंगानुपात 1000 के मुकाबले 941 तक पहुंच चुका है। इस आंकड़े की तस्दीक चीफ मेडिकल ऑफिसर भी करते हैं।
2009 बैच की सेकेंड आईएएस टॉपर हैं शरणदीप कौर बराड़
बेटी बचाओ के मुद्दे पर गंभीर काम करने की एक वजह शायद ये भी है कि शरणदीप खुद अपनी माता-पिता की इकलौती संतान हैं। उनके पिता मंजीत सिंह बराड़ एक सामान्य किसान और उनकी मां सुरजीत कौर एक रिटायर्ड टीचर हैं। किसान पिता ने उन्हें आईएएस बनाने का न सिर्फ सपना देखा बल्कि उसे साकार भी किया। शरणदीप कौर बराड़ 2009 बैच की सेकेंड आईएएस टॉपर हैं। बराड़ कहती हैं कि उनके माता-पिता का हौसला उनको यह प्रेरणा देता है कि बेटियां भी बुलंदियों को छू सकती हैं लेकिन उन्हें यह मौका तब मिलेगा जब उन्हें जन्म लेने का अधिकार दिया जाए।
गर्व की सबसे बड़ी वजह ‘बेटियां’
पीएनडीटी और लिंग परीक्षण के मोर्चे पर प्रशासन ने कड़े कदम उठाए और उसका परिणाम आज सामने है। लोकल इंटेलीजेंस यूनिट के अधिकारी अजय शर्मा सराहनीय प्रयासों का जिक्र करते हुए कहते हैं कि ‘लिंगानुपात को सुधारने के लिए उनकी टीम ने डाक्टरों की मदद से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में पिछले दो सालों में 7 बड़े सीक्रेट ऑपरेशन्स को अंजाम दिए जहां पर कि मोटी रकम लेकर लिंग परीक्षण किया जा रहा था। चूंकि यह इलाका पंजाब और राजस्थान की सीमा से सटा है इसलिए हरियाणा में सख्ती के बाद लोग लिंग जांच के लिए पंजाब और राजस्थान का भी रुख कर लेते हैं’।
1000 लडक़ों के मुकाबले 941 के आंकड़े तक लिंगानुपात को पहुंचाना निश्चित तौर पर बड़ी उपलब्धि है। जिसे शरणदीप और उनकी टीम ने बिना ज्यादा शोर शराबे के अंजाम दिया है। मनोविज्ञान की छात्रा रही बराड़ लाइमलाइट से दूर ही रहना पसंद करती हैं लेकिन महज 11 महीनों में उनकी उपलब्धियों के मद्देनजर हरियाणा उनमें भविष्य का एक बेहतर प्रशासक और स्वपनदृष्टा देख रहा है।