नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में चल रही बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सुनवाई 2 सप्ताह के लिए टल गई है। लाल कृष्ण आडवाणी के वकील ने अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। इस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 13 नेता आरोपी हैं। कोर्ट ने सभी पक्षों से लिखित में हलफनामा देने को कहा है। अप्रैल 6 को अदालत अगली सुनवाई करेगी। 22 मार्च को भी अदालत ने एक दिन के लिए इस मुकदमे की सुनवाई टाल दी थी।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 6 मार्च को अयोध्या मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने पूछा था कि क्यों ना लखनऊ और रायबरेली की अलग अलग अदालतों में चल रहे मुकदमों का ट्रायल एक साथ किया जाये। सीबीआई ने भी कोर्ट के सुझाव का समर्थन किया था।
अगर कोर्ट दोनों मुकदमों के एक साथ ट्रायल का आदेश देती हैं, तो आडवाणी और दूसरे आरोपियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि तब उन्हें आपराधिक साजिश के मुकदमे का भी सामना करना पड़ेगा। इस वक्त विवादित ढांचा विध्वंश को लेकर दो मुकदमे लखनऊ और रायबरेली की अदालतों में चल रहे हैं, लखनऊ का मुकदमा उन कारसेवको के खिलाफ हैं जिन्होंने विवादित ढांचे को गिराया था।
वहीं दूसरी ओर, रायबरेली वाले मामले में आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर जैसे बीजेपी और संघ परिवार से जुड़े लोगों पर उकसाने वाला भाषण देने के लिए आरोपी बनाया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 21 मई 2010 को बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत दूसरे बीजेपी और वीएचपी के नेताओं के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र का मामला हटा लिया गया था जिसके खिलाफ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
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