नई दिल्ली: विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पवित्र कैलाश मानसरोवर की इस वर्ष की यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को शनिवार को रवाना किया। सुषमा ने साथ ही तीर्थयात्रियों से अपील भी की कि चीन में प्रवेश के बाद वे अधिक जिम्मेदार रहें और ऐसा कोई कार्य नहीं करें जिससे देश की छवि पर धब्बा लगे। इस वर्ष 25 जत्थों में करीब 1430 तीर्थयात्रियों के चीन स्थित तिब्बत की तीर्थयात्रा करने की उम्मीद है। 60 तीर्थयात्रियों के 18 जत्थे लिपुलेख दर्रा मार्ग जबकि 50 तीर्थयात्रियों के सात जत्थे नाथुला मार्ग का इस्तेमाल करेंगे।
इस महीने शुरू होने वाली यात्रा अगले चार महीने तक चलेगी जब तक कि तीर्थयात्रियों का आखिरी जत्था धार्मिक यात्रा पूरी न कर ले। इस वर्ष की यात्रा के लिए 2260 व्यक्तियों से अधिक ने आवेदन दिया था, तीर्थयात्रियों का चयन एक कम्प्यूटरीकृत प्रक्रिया से किया गया। पिछले वर्ष 23 जत्थों में 999 तीर्थयात्रियों ने दोनों रास्तों का इस्तेमाल करते हुए यात्रा की थी। सुषमा ने कहा, लोग कहते हैं कि जब आप कैलाश (पर्वत) देखते हैं तो आप एक दूसरी दुनिया में चले जाते हैं और जब आप कैलाश मानसरोवर से जल पीते हैं तो वह अमृत पान करने जैसा होता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस वर्ष तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के प्रयास किए हैं जिसमें जत्थे के चीन में प्रवेश के बाद यात्रा पर लाइजनिंग आफिसर के जरिये नजर रखना शामिल है।