नई दिल्ली: सूखे और पानी संकट से जूझ रहे बुंदेलखंड के लिए भेजी गई केंद्र की वाटर एक्सप्रेस ट्रेन को राज्य सरकार ने लेने से ही इनकार कर दिया है। हाल यह है कि यह ट्रेन बुधवार शाम से ही झांसी रेलवे स्टेशन पर खड़ी है। यूपी सरकार ने महोबा के डीएम को निर्देश दिया है कि वो रेलवे को सूचित करें कि उन्हें पानी की ट्रेन नहीं चाहिए। यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन के मुताबिक यूपी सरकार ने पानी के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। उन्हें ट्रेन की जरूरत नहीं है। जहां जहां जरूरी है वहां हम टैंकर के जरिए पानी ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर ग्राम पंचायत में एक एक कुआं भरने का निर्देश दिया गया है।
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने पिछले महीने कहा था कि केंद्र का प्रयास है ऐसी रणनीति बनाना जिससे इलाके की पानी की समस्या और गरीबी की समस्या से निजात पाया जा सके। इस समस्या की वजह से लोग यहां से पलायन कर रहे हैं। इस समय मंत्री ने यूपी और मध्य प्रदेश के 10 सांसदों से मुलाकात की थी। ये सभी सांसद बुंदेलखंड इलाके से थे। बुंदेलखंड एक-दो जिलों वाला इलाका नहीं है। इसमें उत्तर प्रदेश के सात और मध्य प्रदेश के छह जिले आते हैं। यह इलाका एक भरे पूरे प्रदेश के बराबर है। आबादी दो करोड़ है।
जल विज्ञान के विशेषज्ञ हिसाब लगाकर बता रहे हैं कि इस समय देश में बढ़ती आबादी के कारण प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष जल उपलब्धता सिर्फ 75 फीसद बची है। यानी हर व्यक्ति के हिस्से में बादलों से ही चार बाल्टी की बजाए सिर्फ तीन बाल्टी मिल रहा है। इसी आधार पर इसी स्तंभ में दो महीने पूर्व लिखा गया था कि पानी की छीना झपटी के दिन आने की आहट।