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रमजी कहते हैं वो खुद भी मुसलमान हैं। उसी पीढ़ी के मुसलमान जिसके वो आतंकी भी हैं जिन्होंने पेरिस में 13 नवंबर को हमला कर 130 लोगों की जान ली थी।
आखिर क्या चलता है आतंकियों के दिमाग में ?
- आतंकी टेलीग्राम के जरिए हमले की तैयारी करते थे।
- आतंकियों के साथ छह महीने बिताकर पत्रकार को ये समझ आया कि आतंकी कैम्प में इस्लाम के लिए कोई जगह नहीं है।
- वहां सिर्फ भटके हुए, हताश, आत्महत्या के लिए प्रेरित और आसानी से भ्रमित किए गए युवा हैं।
- ये वो युवा हैं जो कुछ और ढूंढ रहे थे और उन्हें ये मिला।
- ये उनका दुर्भाग्य है कि वो इस समय में पैदा हुए हैं जब आईएसआईएस है।