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'उत्तराखंड में नहीं चलेगा मदरसा बोर्ड का पाठ्यक्रम', हरिद्वार में संतों के बीच बोले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

 Published : Apr 19, 2026 12:21 pm IST,  Updated : Apr 19, 2026 12:38 pm IST

सीएम धामी ने साफ कहा कि मदरसा बोर्ड को भंग करके आगामी सत्र से उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। सरकार के दिशा निर्देश न मानने वाले मदरसे पर कानूनी कार्रवाई की भी बात कही है।

सीएम पुष्कर सिंह धामी- India TV Hindi
सीएम पुष्कर सिंह धामी Image Source : PTI

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मदरसा को लेकर बड़ा बयान दिया है। सीएम धामी ने उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को भंग करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र से राज्य के मदरसों में उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।

मदरसों को अपनाना होगा निर्धारित पाठ्यक्रम

हरिद्वार में संतों के बीच आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब मदरसा बोर्ड का अलग पाठ्यक्रम नहीं चलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी मदरसों को निर्धारित नए पाठ्यक्रम को अपनाना होगा।

बंद किए जा सकते हैं मदरसे

सीएम धामी ने यह भी कहा कि जो मदरसे सरकार के निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर ऐसे मदरसों को बंद भी किया जा सकता है।

शिक्षा व्यवस्था और मदरसों को लेकर नई चर्चा शुरू

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य में शिक्षा व्यवस्था और मदरसों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य सभी छात्रों को एक समान और मानकीकृत शिक्षा उपलब्ध कराना है।

जानिए क्या है मदरसा बोर्ड?

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड एक राज्य स्तरीय संस्था है, जो उत्तराखंड के मदरसों की पढ़ाई-लिखाई और संचालन से जुड़े काम देखती है। राज्य में जो मदरसे चलते हैं, उन्हें मदरसा बोर्ड से मान्यता लेनी होती है।बिना मान्यता के मदरसे को सरकारी सुविधाएं नहीं मिलतीं हैं।

क्या होती है मदरसा में पढ़ाई?

 इस बोर्ड के तहत मदरसों में दो तरह की पढ़ाई होती है। पहले में धार्मिक शिक्षा और दूसरे में सामान्य शिक्षा भी होती है। धार्मिक शिक्षा में कुरान, हदीस, अरबी भाषा और इस्लामिक इतिहास पढ़ाया जाता है। वहीं, मदरसों की कुछ कक्षाओं में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान आदि विषय पढ़ाए जाते हैं।

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