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सावधान! 9 में से 1 व्यक्ति संक्रामक रोग से है संक्रमित, सामने आई चौंकाने वाली ICMR की ये रिपोर्ट

 Published : Nov 02, 2025 05:57 pm IST,  Updated : Nov 02, 2025 06:04 pm IST

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की जो रिपोर्ट सामने आई है, उसमें संक्रमण दर पिछली तिमाही की तुलना में 0.8 प्रतिशत बढ़ गई है। इससे संक्रमित लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : FREEPIK

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अधीन प्रयोगशालाओं के नेटवर्क द्वारा किए गए परीक्षणों में, 4.5 लाख मरीजों में से 11.1 प्रतिशत मरीजों में रोगजनक (पैथोजन्स) पाए गए। यह अध्ययन सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण विषाणु संक्रमणों की पहचान के प्रयासों का हिस्सा था। पाए गए शीर्ष पांच रोगजनक में तीव्र श्वसन संक्रमण (ARI)/गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (SARI) मामलों में इन्फ्लूएंजा ए, तेज बुखार के मामलों में डेंगू वायरस, पीलिया के मामलों में हेपेटाइटिस ए, तीव्र दस्त रोग (एडीडी) के प्रकोप में नोरोवायरस और तीव्र इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के मामलों में हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस (HSV) शामिल हैं। 

अप्रैल से जून 2025 तक 11.5 प्रतिशत रोगाणु पाए गए

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की रिपोर्ट के अनुसार, संक्रामक रोगों का प्रसार 2025 की पहली तिमाही के 10.7 प्रतिशत से बढ़कर दूसरी तिमाही में 11.5 प्रतिशत हो गया। आईसीएमआर के वायरस अनुसंधान एवं निदान प्रयोगशाला (VRDL) नेटवर्क के अनुसार, जनवरी से मार्च के बीच 2,28,856 नमूनों में से 24,502 (10.7 प्रतिशत) में रोगाणु पाए गए। वहीं, अप्रैल से जून 2025 तक, 2,26,095 नमूनों में से 26,055 (11.5 प्रतिशत) में रोगाणु पाए गए। 

संक्रमण दर पिछली तिमाही की तुलना में 0.8 प्रतिशत बढ़ी

इस प्रकार, संक्रमण दर पिछली तिमाही की तुलना में 0.8 प्रतिशत बढ़ गई, जो संक्रमण के प्रसार की कड़ी निगरानी की आवश्यकता का संकेत है। एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार, हालांकि यह वृद्धि बहुत ज्यादा प्रतीत नहीं होती, लेकिन इसे कम करके नहीं आंका जाना चाहिए, क्योंकि यह मौसमी बीमारियों और उभरते संक्रमणों के लिए एक चेतावनी का काम कर सकती है। 

40 लाख से अधिक नमूनों का परीक्षण 

उन्होंने कहा, ‘अगर हम संक्रमण दर में तिमाही बदलावों पर नजर रखना जारी रखें, तो भविष्य में होने वाली महामारियों को समय रहते रोका जा सकता है।’ संक्रामक रोगों के मद्देनजर वीआरडीएल नेटवर्क देश के लिए एक पूर्व चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करता है। वर्ष 2014-2024 तक 40 लाख से अधिक नमूनों का परीक्षण किया गया, जिनमें से 18.8 प्रतिशत में रोगाणु की पहचान की गई थी। (भाषा के इनपुट के साथ)

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