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इस्लामी विद्वानों ने कहा, तबलीगी जमात पर लगाया बैन हटाए सऊदी अरब

Edited by: IndiaTV Hindi Desk Published : Dec 14, 2021 06:41 pm IST, Updated : Dec 14, 2021 06:41 pm IST

दारुल उलूम देवबंद के मुख्य मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी ने सऊदी अरब से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है।

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Image Source : PTI/AP जम्मू-कश्मीर के इस्लामी विद्वानों ने सऊदी अरब से तबलीगी जमात पर लगा प्रतिबंध हटाने की अपील की।

Highlights

  • सऊदी अरब ने 6 दिसंबर को तबलीगी जमात पर प्रतिबंध लगा दिया था।
  • सऊदी सरकार से उसके फैसले पर पुनर्विचार करने का आह्वान किया गया।
  • दारुल उलूम देवबंद ने भी सऊदी अरब के कथित निर्णय की निंदा की है।

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के इस्लामी विद्वानों ने मंगलवार को सऊदी अरब से तबलीगी जमात पर लगा प्रतिबंध हटाने की अपील की। इस्लामी विद्वानों के संगठन मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (MMU) ने श्रीनगर में हुई बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें सऊदी अरब से उसके फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा गया। गौरतलब है कि सऊदी अरब ने 6 दिसंबर को तबलीगी जमात को 'समाज के लिए खतरा और आतंकवाद का द्वार' करार देते हुए इस पर प्रतिबंध लगा दिया था।

‘फैसले पर पुनर्विचार करने का आह्वान किया गया’

MMU ने एक बयान में कहा, 'बैठक में पेश प्रस्ताव के मुताबिक, शुद्ध रूप से धार्मिक संगठन तबलीगी जमात पर सऊदी अरब सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध पर गहरी चिंता जतायी गई। साथ ही सऊदी सरकार से उसके फैसले पर पुनर्विचार करने का आह्वान किया गया।' इससे पहले विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने इस्लामी मिशनरी आंदोलन तबलीगी जमात को 'आतंकवाद का प्रवेश द्वार' घोषित कर इस पर प्रतिबंध लगाने के सऊदी अरब के कथित निर्णय की निंदा की है।

‘मुसलमानों के बीच गलत संदेश जा सकता है’
दारुल उलूम देवबंद के मुख्य मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी ने सऊदी अरब से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा न हुआ, तो मुसलमानों के बीच गलत संदेश जा सकता है। ऐसा पहली बार हुआ है जब दारुल उलूम देवबंद ने सऊदी सरकार की खुलेआम निंदा की है। सऊदी अरब के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने हाल में तबलीगी जमात को आतंकवाद का प्रवेश द्वार करार देते हुए उस पर प्रतिबंध लगा दिया था।

‘मैं सऊदी अरब के फैसले से हैरान हूं’
प्रख्यात मुस्लिम कार्यकर्ता जफर सरेशवाला ने कहा, 'मैं सऊदी अरब के फैसले से हैरान हूं, क्योंकि तबलीगी जमात हमेशा से किसी भी चरमपंथी विचार का विरोधी रहा है। जमात ने सभी आधुनिक जिहादी आंदोलनों को अस्वीकार किया है। यहां तक कि तालिबान ने भी कई बार तबलीगी जमात के खिलाफ बात की है।' उन्होंने कहा कि सऊदी अरब द्वारा तबलीग को आतंकवाद के प्रवेश द्वार के रूप में वर्णित करना अविश्वसनीय और अस्वीकार्य है।

‘यह तबलीगी जमात पर बड़ा आरोप है’
ब्रिटेन से एक वीडियो संदेश में हजरत निजामुद्दीन मरकज के तबलीगी जमात के प्रवक्ता समीरुद्दीन कासमी ने कहा, 'यह तबलीगी जमात पर बड़ा आरोप है। इसका आतंकवाद से कोई संबंध नहीं है। तबलीगी जमात वह समूह है, जो आतंकवाद की निंदा करता है और इसे खारिज करता है। हम किसी को भी किसी भी धर्म, समुदाय और देश के खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं देते हैं। हम केवल इस्लाम के 5 स्तंभों की बात करते हैं, हमारा कोई भी व्यक्ति कभी भी किसी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल नहीं पाया गया है।'

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