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जैश-ए-मोहम्मद की 'मैडम सर्जन' पर बड़ा खुलासा, 'ऑपरेशन हमदर्द' और 'टीम डी' जांच के घेरे में

 Reported By: Vishal Pratap Singh Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Nov 13, 2025 01:25 pm IST,  Updated : Nov 13, 2025 01:25 pm IST

खुफिया एजेंसियों ने जैश-ए-मोहम्मद की टॉप कमांडर डॉ. शाहीन उर्फ 'मैडम सर्जन' से जुड़ा बड़ा खुलासा किया है। वह 'ऑपरेशन हमदर्द' के तहत लड़कियों की ब्रेनवॉशिंग कर भर्ती कर रही थी। यूपी एटीएस ने उसकी ‘टीम डी’ को डिकोड किया है। बैंक खातों और फंडिंग की जांच जारी है।

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डॉक्टर शाहीन। Image Source : REPORTER INPUT

नई दिल्ली/लखनऊ/कानपुर: खुफिया एजेंसियों ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की टॉप कमांडर डॉ. शाहीन के बारे में अहम जानकारियां उजागर की हैं। सूत्रों के मुताबिक, डॉ. शाहीन को संगठन में 'मैडम सर्जन' का कोडनेम दिया गया था। उसके करीबी साथी और जैश के अन्य आतंकी उन्हें इसी नाम से पुकारते थे। शाहीन लड़कियों के ब्रेन वॉश और संगठन में उनकी भर्ती के काम में लगी हुई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाहीन लड़कियों को कैटिगरी में बांटकर उन्हें दहशतगर्दी की तरफ मोड़ने का काम करती थी।

क्या था जैश का 'ऑपरेशन हमदर्द'

जैश-ए-मोहम्मद ने 'ऑपरेशन हमदर्द' नाम का खास अभियान चलाया था। इसमें युवा मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं से हमदर्दी दिखाकर उन्हें दहशतगर्दी की तरफ ले जाने की योजना थी। इस ऑपरेशन को तीन हिस्सों में बांटा गया था:

  1. पहली कैटेगरी: आर्थिक रूप से कमजोर मुस्लिम लड़कियां और महिलाएं। इन्हें पैसे का लालच देकर दहशतगर्दी के रास्ते पर लाने की साजिश थी।
  2. दूसरी कैटेगरी: जो लड़कियां और महिलाएं आम तौर पर बुर्का नहीं पहनतीं और जिनकी ख्वाहिशें बहुत बड़ी होती हैं। इन्हें विदेश ले जाने, बड़े-बड़े ख्वाब दिखाने और ऐशो-आराम की जिंदगी का वादा करने का प्लान था।
  3. तीसरी कैटेगरी: विचारों से कट्टरपंथी लड़कियां और महिलाएं, जो आसानी से जिहाद के रास्ते पर आ जातीं।

'मैडम सर्जन' इसी ऑपरेशन को अंजाम देने में जुटी हुई थीं।

'टीम डी' पर यूपी एटीएस की नजर

उत्तर प्रदेश एटीएस ने शाहीन की 'टीम डी' को डिकोड कर लिया है। टीम डी में शाहीन के डॉक्टर साथी शामिल थे। जैश को भेजे संदेशों और चैटबॉक्स में 'टीम डी' का जिक्र मिला है। आतंकियों के बीच बातचीत के लिए कोडवर्ड्स इस्तेमाल होते थे:

  1. आतंकी को 'स्पेशलिस्ट' कहा जाता था।
  2. चैटबॉक्स में 'हार्ट स्पेशलिस्ट', 'आई स्पेशलिस्ट', 'फिजिशियन' जैसे शब्दों का प्रयोग होता था।
  3. पैसों का इंतजाम करने के लिए 'ऑपरेशन की तैयारी' शब्द।
  4. छोटे हथियारों के लिए 'मेडिसिन स्टॉक'।
  5. रेकी वाली जगह के लिए 'ऑपरेशन थिएटर'।

टीम डी के सभी सदस्यों को अलग-अलग काम सौंपे गए थे। यह टीम जैश के टॉप कमांडर के सीधे संपर्क में थी।

बैंक अकाउंट्स की शुरू हुई जांच

एजेंसियां डॉ. परवेज और डॉ. आरिफ के बैंक अकाउंट डिटेल्स खंगाल रही हैं। डॉ. आरिफ को बुधवार (12 नवंबर) को कानपुर से हिरासत में लिया गया। सहारनपुर में भी कई संदिग्धों के अकाउंट्स की जांच हो रही है। शुरुआती जांच से पता चला है कि ग्रुप ने भर्ती और ट्रेनिंग के लिए फंड चैनल करने के लिए कई अकाउंट्स रखे थे। विदेशी फंड ट्रांसफर और संदिग्ध जमा राशि पर फोकस है। एजेंसियां मान रही हैं कि जैश की लीडरशिप ने डॉ. शाहीन और टीम डी को यूपी के कुछ हिस्सों में यह ऑपरेशन चलाने के लिए सीधे ब्रिफ किया था। एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और कोड लैंग्वेज को क्रैक करने को हाल के महीनों की सबसे बड़ी खुफिया कामयाबी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां व खुलासे होने की उम्मीद है।

डॉक्टर उमर की कार में हुआ था ब्लास्ट

दिल्ली पुलिस ने लाल किला ब्लास्ट केस, जिसमें 12 लोगों की जान गई,  मुख्य आरोपी डॉ. उमर की मूवमेंट्स को करीब 50 लोकेशंस की CCTV फुटेज से ट्रेस किया है। 10 नवंबर को डॉ. उमर फरीदाबाद से दिल्ली आए। बदरपुर बॉर्डर से एंट्री के बाद साउथ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट, फिर ईस्ट डिस्ट्रिक्ट, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की रिंग रोड, नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट, नॉर्थ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के अशोक विहार (जहां खाना खाया), फिर सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में मस्जिद विजिट, और आखिर में नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के लाल किले पार्किंग एरिया पहुंचा। करीब 3 घंटे बाद वह पार्किंग से बाहर निकला और कार में धमाका हो गया।

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