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धर्म, जाति और लिंग के आधार पर बच्चे के साथ ऐसा होना गलत, मुजफ्फरनगर स्कूल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये आदेश

 Written By: Avinash Rai @RaisahabUp61
 Published : Sep 25, 2023 02:27 pm IST,  Updated : Sep 25, 2023 02:27 pm IST

मुजफ्फरनगर के स्कूल में बच्चे को सहपाठियों से थप्पड़ मरवाने के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि शिक्षा के अधिकार के तहत किसी भी बच्चे के साथ धर्म, जाति या लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है।

muzaffarnagar school student slap case Supreme Court said it is wrong to do this to a child- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई Image Source : PTI

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक स्कूली छात्र को दूसरे सहपाठियों से थप्पड़ मरवाने का वीडियो तो आपने भी देखा होगा। शिक्षिका तृप्ति त्यागी इस मामले में आरोपी हैं। इस मामले की सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट मे चली। जस्टिस अभय एस ओक और पंकज मिथल की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। बच्चे को थप्पड़ से मरवाने के मामलो को कोर्ट ने गंभीरता से लेते हए कहा कि धर्म के आधार पर किसी बच्चे के साथ ऐसा करना गलत है। गौरतलब है कि मामला 24 अगस्त का है जब खुब्बापुर गांव के नेहा पब्लिक स्कूल में शिक्षिका तृप्ति त्यागी ने एक बच्चे को दूसरे बच्चों से थप्पड़ मरवाया था। इसके वीडियो के वायरल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। 

मुजफ्फरनगर मामले में सुप्रीम कोर्ट का मत

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मामले की जांच की निगरानीके लिए 1 सप्ताह के भीतर किसी आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति की जाए। साथ ही इस मामले में किन धाराओं को लगाया जाएगा, यह देखना भी उस आईपीएस अधिकारी का काम होगा। साथ ही जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को दी जाए और गवाहों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पीड़ित बच्चे की शिक्षा की व्यवस्था दूसरे स्कूल में की जाए तथा थप्पड़ मारने वाले सभी बच्चों की काउंसलिंग कराई जाए।

बता दें कि मुजफ्फरनगर मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका तुषार गांधी ने दायर की थी। इस फैसले की सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत सभी बच्चों को मुफ्त शिक्षा देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। बावजूद इसके गैर मान्यता प्राप्त स्कूल में बच्चे पढ़ रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में केस दर्ज करने में देरी हुई है। जजों की बेंच शिक्षा के अधिकार कानून का हवाला देते हुए कहा कि इसमें बताया गया है कि किसी भी बच्चे को जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव का सामना न करना पड़े। बता दें कि इस मामले पर अब अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।

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