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एन. रंगासामी ने 5वीं बार संभाली पुडुचेरी की कमान, मुख्यमंत्री पद की ली शपथ

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : May 13, 2026 08:25 am IST,  Updated : May 13, 2026 10:41 am IST

AINRC के प्रमुख एन. रंगासामी ने आज पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राजभवन में उप-राज्यपाल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के रूप में रंगासामी का 5वां कार्यकाल है।

N. Rangasamy- India TV Hindi
एन. रंगासामी Image Source : PTI

पुडुचेरी: ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (AINRC) के प्रमुख एन. रंगासामी ने आज यानी 13 मई को केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उप-राज्यपाल के. कैलाशनाथन ने उन्हें राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

AINRC ने 12 सीटों पर दर्ज की जीत

यह पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के रूप में रंगासामी का 5वां कार्यकाल है। 09 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में AINRC ने 16 सीट पर लड़ते हुए 12 सीट पर जीत हासिल की, जबकि उसके गठबंधन सहयोगी बीजेपी ने 10 पर लड़ते हुए 04 सीट जीतीं। AIADMK और लाचित जननायगा काची ने एक-एक सीट जीती, जिससे 30 सदस्यीय विधानसभा में NDA की कुल संख्या 18 हो गई। पुडुचेरी में फिर से गठबंधन सरकार बनी है।

पांचवीं बार लेंगे पद और गोपनीयता की शपथ

एन. रंगासामी के नेतृत्व का सफर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से शुरू हुआ था, जहां उन्होंने 2001 से 2006 और फिर 2006 से 2008 तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवा दी। हालांकि, 2011 में कांग्रेस से अलग होकर उन्होंने अपनी पार्टी- ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (AINRC) बनाई और उसी साल विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल कर तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। उनका चौथा कार्यकाल गठबंधन की राजनीति और केंद्र शासित प्रदेश के विकास पर केंद्रित रहा, और अब 2026 के विधानसभा चुनाव में मिली जीत ने उनके पांचवें कार्यकाल का मार्ग प्रशस्त किया है।

पिछले चुनाव का सियासी समीकरण

2021 के चुनाव परिणाम की बात करें तो एन. रंगासामी के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया था। कुल 30 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसमें रंगासामी की पार्टी AINRC ने सबसे ज्यादा 10 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी ने 6 सीटों पर कब्जा किया। दूसरी ओर, तत्कालीन सत्ताधारी कांग्रेस-डीएमके गठबंधन (SDA) को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी और वे मात्र 8 सीटों (DMK-6, कांग्रेस-2) पर सिमट गए थे। इसके अलावा, 6 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल कर अपनी ताकत दिखाई थी।

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